सावन सोमवार: जानिए व्रत का महत्व और पूजा विधि

0

आज से सावन सोमवार शुरू हो चुके हैं| सुबह से ही भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है| देशभर में भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं| कहते हैं कि जो भी भक्त भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से भक्ति करता है, उसकी सभी परेशानियां और दुःख दूर हो जाते हैं|  सोमवार और भगवान शिव में संबंध के कारण ही माता पार्वती ने सोलह सोमवार व्रत किया था|

जानिए व्रत का क्या है महत्व

सावन सोमवार के ये व्रत विवाह, संतान और अन्य मनोकामनाओं के लिए किया जाता है| कहते हैं कि यदि कुंडली में विवाह का योग न हो या विवाह होने में अड़चनें आ रही हों तो सावन सोमवार करने से सारी मुश्किलें दूर हो जाती हैं|

यदि आपकी कुंडली में आयु या स्वास्थ्य बाधा हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो तो भी यह व्रत करने से श्रेष्ठ परिणाम मिलेंगे| इस बार यह व्रत इसलिए ख़ास है क्योंकि सावन का सोमवार सौभाग्य योग और शतभिषा नक्षत्र में आया है| शतभिषा नक्षत्र में सौ तारे माने जाते हैं, इस नक्षत्र में की गई उपासना से तारे-सितारे बेहतर हो जाते हैं|

सावन सोमवार – पूजा विधि

प्रातः स्नान आदि करके सूर्य पर जल चढ़ाकर शिव मंदिर जाएं| मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और भगवान को साष्टांग करें| आप दूध या गन्ने का रस भी शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं| भगवान शिव को बिल्वपत्र और धतूरा बहुत प्रिय होते हैं| इन्हें सावन के महीने में शिवलिंग पर चढ़ाने पर हर तरह की मनोकामना पूरी होती है| इसके साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ाएं|

हो सके तो शिव मंत्र का १०८ बार जाप करें| व्रत में दिन के समय सिर्फ फलाहार करना चाहिए| सायंकाल भगवान के मन्त्रों का फिर जाप करें तथा उनकी आरती करें| पूजा समाप्त कर आहार ग्रहण कर सकते हैं|

शिवलिंग पर कभी न चढ़ाएं ये

तुलसी 

कहा जाता है कि भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था इसलिए शिवलिंग पर कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाना चाहिए|

हल्दी

भगवान भोलेनाथ को कभी भी हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए| हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से होता है|

कुमकुम

भगवान भोलेनाथ वैरागी होते हैं, जबकि कुमकुम को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवजी को कुमकुम नहीं चढ़ता|

टूटे हुए चावल

भगवान् शिव को साबुत चावल ही अर्पित किए जाते हैं| शास्त्रों में बताया है कि टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिवजी को नहीं चढ़ता|

तिल

तिल भगवान भोलेनाथ को इसीलिए नहीं चढ़ाया जाता क्योंकि कहा जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के मैल से हुई है|

सावन में भूलकर भी न करें यह भूल नहीं तो…

Share.