इस विशेष मंत्र से रूप चौदस पर प्रसन्न होंगे शनिदेव

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हर व्यक्ति के जीवन में ज्योतिष और वास्तु का बड़ा महत्व होता है। ग्रह-नक्षत्र की स्थिति और ग्रह-दशा का प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि शनि ग्रह किसी की कुंडली में अशांत हो जाए तो फिर उसके जीवन में परेशानियों और कष्टों का आगमन हो जाता है। अगर आपकी कुंडली में भी शनिदोष है तो शनिवार के दिन शनि महाराज की उपासना और व्रत रखना चाहिए। ऐसा करने से शनि महाराज प्रसन्न होते हैं और शनिदोष का निवारण होता है। हालांकि शनिवार को शनि महाराज का व्रत रखने और पूजन की भी विधि होती है। अगर पूरे विधि-विधान से उनकी आराधना की जाए तो शनि दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। आज हम आपको बता रहे हैं शनिवार व्रत से जुड़ी कुछ अहम बातें।

सबसे पहले तो शनिवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ़-स्वच्छ वस्त्र पहनकर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए और पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद लोहे से निर्मित शनिदेव के मूर्ति की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद चावलों से बनाए गए चौबीस दल के कमल पर मूर्ति को स्थापित करें। अब शनिदेव को काले तिल, पुष्प, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि चढ़कर उनकी पूजा करें। इस दौरान शनि मंत्र का जाप करें या फिर शनि महाराज के 10 नामों का उच्चारण करें। शनिदेव के 10 नाम – कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनेश्चर हैं।

शनि महाराज की पूजन के बाद पीपल के पेड़ के तने पर सूत के धागे को सात परिक्रमा करते हुए लपेटें। इसके बाद शनिदेव के मंत्र का जाप करें और शनिदेव से प्रार्थना करें। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र का जाप करना बेहद जरूरी है। आज हम आपको शनिदेव के उसी मंत्र के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे शनिदेव बेहद जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।

शनि मंत्र — शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे।केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥

अगर कुंडली में शनिदोष है तो सिर्फ एक या दो शनिवार को शनिदेव की पूजा करने से कोई लाभ नहीं होता। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए और शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे 7 शनिवार व्रत रखना चाहिए और शनिदेव की उपासना करनी चाहिए। इस दौरान राहु की कुदृष्टि से सुरक्षा के लिए राहु, केतु के नाम की 108 आहुति देनी चाहिए। इसके लिए आहुति देते समय कृष्ण जौ, काले तिल का इस्तेमाल जरूर करें।

Prabhat jain

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