साईंबाबा के ये 11 वचन पढ़ें, जीवन में आगे बढ़े

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शिर्डी के साईं बाबा की महिमा अति न्यारी है| उनकी कृपा से सभी बिगड़े काम पूरे हो जाते हैं | जो भी शिरडी जाता है, साईं का ही होकर रह जाता है| साईंबाबा को एक चमत्कारी पुरुष, अवतार और भगवान का स्वरूप माना जाता है| सबका मालिक एक और श्रद्धा सबूरी पर ही उनका विशेष जोर रहा है| साईं को हर धर्म में मान्यता प्राप्त है, हर धर्म के मानने वाले साईं में आस्था रखते हैं| मुख्य तौर पर साईं बाबा की आराधना तीन रूपों में की जाती है| पहली चमत्कारी पुरुष के रूप में, दूसरी भगवान के रूप में और तीसरी गुरु के रूप में| साईं बाबा के ग्यारह वचन (Sai Baba 11 Exhortation ) हर समस्या का समाधान हैं|

भगवान के अवतार या कुछ और, क्या है साईं बाबा की सच्चाई?

आइए जानते हैं साईं बाबा और उनके वचनों (Sai Baba 11 Exhortation ) की महिमा:

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पहला वचन

‘जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा|’
साईं बाबा की लीला स्थली शिरडी रही है| इसलिए साईं कहते हैं कि शिरडी आने मात्र से समस्याएं टल जाएंगी| जो लोग शिरडी नहीं जा सकते उनके लिए साईं मंदिर जाना भी पर्याप्त होगा|

दूसरा वचन

‘चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर|’
– साईं बाबा की समाधि की सीढ़ी पर पैर रखते ही भक्त के दुःख दूर हो जाएंगे| साईं मंदिरों में प्रतीकात्मक समाधि के दर्शन से भी दुःख दूर हो जाते हैं, लेकिन मन में श्रद्धा भाव का होना जरूरी है|

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तीसरा वचन

‘त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा|’
साईं बाबा कहते हैं कि मैं भले ही शरीर में न रहूं| लेकिन जब भी मेरा भक्त मुझे पुकारेगा, मैं दौड़ के आऊंगा और हर प्रकार से अपने भक्त की सहायता करूंगा|

चौथा वचन

‘मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस|’
हो सकता है मेरे न रहने पर भक्त का विश्वास कमजोर पड़ने लगे| वह अकेलापन और असहाय महसूस करने लगे|
लेकिन भक्त को विश्वास रखना चाहिए कि समाधि से की गई हर प्रार्थना पूर्ण होगी|

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पांचवां वचन

‘मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो|’
साईं बाबा कहते हैं कि मैं केवल शरीर नहीं हूं| मैं अजर-अमर अविनाशी परमात्मा हूं, इसलिए हमेशा जीवित रहूंगा| यह बात भक्ति और प्रेम से कोई भी भक्त अनुभव कर सकता है|

छठा वचन

‘मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए|’
जो कोई भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से मेरी शरण में आया है, उसकी हर मनोकामना पूरी हुई है|

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सातवां वचन

‘जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का|’
जो व्यक्ति मुझे जिस भाव से देखता है, मैं उसे वैसा ही दिखता हूं| यही नहीं जिस भाव से कामना करता है, उसी भाव से मैं उसकी कामना पूर्ण करता हूं|

आठवां वचन 

‘भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा|’
जो व्यक्ति पूर्ण रूप से समर्पित होगा उसके जीवन के हर भार को उठाऊंगा| और उसके हर दायित्व का निर्वहन करूंगा|

नौवां वचन

‘आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर|’
जो भक्त श्रद्धा भाव से सहायता मांगेगा उसकी सहायता मैं जरूर करूंगा|

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दसवां वचन

‘मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया|’
जो भक्त मन, वचन और कर्म से मुझ में लीन रहता है, मैं उसका हमेशा ऋणी रहता हूं| उस भक्त के जीवन की सारी जिम्मेदारी मेरी है|

ग्यारहवां वचन

‘धन्य धन्य व भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य|’
साईं बाबा कहते हैं कि मेरे वो भक्त धन्य हैं जो अनन्य भाव से मेरी भक्ति में लीन हैं| ऐसे ही भक्त वास्तव में भक्त हैं|

File:Shirdi Sai Baba and devotees2.jpg

इस तरह को कब पढ़ें ?

किसी भी गुरुवार इन वचनों को पीले कागज पर लाल कलम से लिख लें| फिर इन वचनों को अपने पूजा स्थान, शयन कक्ष और काम करने की जगह पर लगा दें| प्रतिदिन पूजा के पहले, सोने से पहले, काम करने के पहले और सोकर उठने के बाद इन वचनों को पढ़ें| इन्हें पढ़ने के बाद साईंबाबा का स्मरण करें, आपको साईं बाबा की कृपा ज़रूर मिलेगी|

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