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रविवार का व्रत करने से मिलेगी पापों से मुक्ति

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रविवार को भगवान सूर्यदेव का दिन माना जाता है| रविवार के दिन यदि कोई व्यक्ति भगवान सूर्यदेव की पूजा –आराधना करता है तो वह अपने समस्त कष्टों से मुक्ति पा सकता है और असीम सुखों को पा सकता है| नारद पुराण में इस बात का उल्लेख है कि रविवार के दिन पूजा करना काफी आरोग्यदायक और शुभ होता है| रविवार का व्रत (Sunday Vrat Vidhi) रखने से जातक पर सूर्यदेव की कृपादृष्टि सदैव बनी रहती है| सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा जाता है और नवग्रह शांति विधान के अनुसार भी सूर्योपासना करने से समस्त ग्रहों की शांति हो जाती है| हर व्यक्ति को रविवार का व्रत रखना चाहिए| प्रातःकाल सूर्यदेव की पूजा करके सूर्य नमस्कार करने चाहिए| इस विधि से पूरा जीवन सुखों से भर जाता है|

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रविवार व्रत विधि (Sunday Vrat Vidhi)

परिवार के सदस्यों को सुबह जल्दी उठ कर स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पण करना चाहिए। इसके बाद सूर्य देवता की प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए धूप-अगरबत्ती, चन्दन की लकड़ी, फूल और विशेष प्रकार के व्यंजनों का प्रयोग करना चाहिए। व्रत आरम्भ करने से पहले रविवार व्रत की कथा परिवार के सभी सदस्यों को सुनानी चाहिए। इसके बाद व्रत का आरम्भ करना चाहिए।व्रत के दौरान तेल, नमक, नींबू के रस वाला भोजन नहीं खाना चाहिए। रविवार का व्रत पूरे दिन चलता है और उसे अगले दिन सूर्य को जल अर्पण करके ही खोला जाता है।​

रविवार व्रत कथा (Sunday Vrat Katha)

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एक समय की बात है कि एक धार्मिक और पवित्र महिला थी। वह अपने घर को बहुत साफ़ रखती थी। यही नहीं वह अपने घर के फर्श पर गाय के गोबर का लेप लगाती थी| पारंपरिक घरों में यह सदियों पुरानी परंपरा है। इसके लिए वह अपने पड़ोस के घर से गाय का गोबर लाती थी। ​यह सब काम करने के बाद ही वह महिला भगवान की पूजा करती थी और खाना खाती थी। एक दिन उस महिला के पड़ोसी ने ईर्ष्या की वजह से गाय को अपने घर के अन्दर बांध दिया ताकि वह महिला गोबर न ले सके। गोबर न मिलने के कारण उस महिला ने सारा दिन कुछ नहीं खाया और रात में भूखे पेट ही सो गई। उस दिन रविवार था और उस महिला ने सारा दिन व्रत रखा था तो सूर्य देवता उससे प्रसन्न हो गए।​

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सूर्य देवता उस महिला के सपने में आए और उससे कहा कि वह उसे गाय उपहार के तौर पर देंगे ताकि उस महिला को अपने घर को साफ़ रखने में कोई समस्या नहीं आए। अगले दिन सुबह उस महिला ने देखा कि उसके घर में एक सुन्दर सी गाय और बछड़ा है। वह गाय सोने का गोबर देने लगी और यह देखकर उस महिला के पड़ोसी को ईर्ष्या हुई। पडोसी ने राजा को उस दिव्य गाय और बछड़े के बारे में बताया। राजा के उस महिला से उस गाय और बछड़े को छीन लिया। जिस दिन राजा के गाय और बछड़े को छीना, वह रविवार का दिन था। फिर से महिला रविवार वाले दिन भूखी रही और उसका व्रत हो गया। उस रात सूर्य देवता राजा के सपने में आए और उसे बताया कि उसने महिला की गाय और बछड़े को छीनकर बहुत बड़ा पाप किया है।

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सूर्य देवता के क्रोध से भयभीत होकर राजा नींद से जाग गया और उसने देखा कि गाय ने सोने का गोबर नहीं दिया बल्कि बहुत ही दुर्गंध वाला गोबर पूरे महल में कर दिया है। राजा ने तुरंत उस गाय और बछड़े को उस महिला को सौंप दिया और उसके पड़ोसी को दंड दिया। इसके बाद वह धार्मिक महिला ख़ुशी से रही और राजा ने भी राज्य के लोगों को सूर्य देवता का रविवार व्रत रखने का सुझाव दिया।

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