कुंडली में पहले भाव के अर्थ में जानें  ज्योतिष में दूसरा घर

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इससे पहले के लेख में हमने देखा कि पहले भाव का तात्पर्य  सूर्योदय  से होता है जो एक व्यक्ति के जन्म को दर्शाता है। जन्म के बाद एक मानव जीवन के लिए पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है। एक बच्चा जो अभी पैदा हुआ है, वह उचित देखभाल और पोषण के लिए दूसरों या परिवार के सदस्यों पर निर्भर है। ज्योतिष (Jyotish) में दूसरा घर जीवन के इस चरण को दर्शाता है। यह परिवार द्वारा दिए गए पोषण, समर्थन और प्यार को दर्शाता है।

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यह आपके परिवार, जन्म के समय घर की स्थिति, परिवार की संपत्ति और परिवार  के सदस्यों का सूचक है | अगर दूसरे भाव में शुभ ग्रहो का प्रभाव होता है तो जातक का जन्म बड़े परिवार में होता है और बचपन से ही उसे काफी लोगो का स्नेह और दुलार मिलता है |

पहला भाव सिर को दिखाता है जबकि दूसरा घर गर्दन तक के चेहरा का सूचक है। इसमें आपकी आंखें, नाक, कान, गाल और मुंह शामिल हैं। आप जो खाना पसंद करते हैं, जैसे मिठाई या मसालेदार या नमकीन; आपकी आवाज – चाहे नरम या कठोर हो, आप किस तरह का संगीत सुनना पसंद करेंगे इत्यादि दूसरे घर द्वारा पता किया जा सकता है ।

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दूसरे भाव से आपको परिवार की खुशी, आपका परिवार के प्रति समर्पण, जिम्मेदारी का निर्वहन, धन का सही उपयोग और परिवार में आपस का सामंजस्य भी आसनी से प्रतिलक्षित होता है |

एक सुखी और पूर्ण विवाहित जीवन, जिसमे ना सिर्फ पति पत्नी बल्कि पुरे समाज और परिवार का संतुलन हो, उसके लिए दूसरे  भाव की शुभ स्थिति अत्यंत आवश्यक है |

जानिए क्या है ज्योतिष में प्रथम भाव का अर्थ

साभार – Pictureastrology.com

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