यश और धन की प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री की करें उपासना

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पूरे देश में धूम-धाम के साथ नवरात्रि का पवन त्यौहार मनाया गया और आज नवरात्रि का आखिरी दिन है। नवरात्रि के नवमी के दिन यानी आखिरी दिन माता सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। मां सिद्धिदात्री देवी दुर्गा का नौवा स्वरुप है। और नवरात्रि के आखिरी यानी नौवे दिन इसी स्वरुप की आराधना की जाती है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से व्यक्ति को यश, धन, मोक्ष और तमाम तरह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

इतना ही नहीं हिन्दू धर्म शास्त्रों में यहां तक बताया गया है कि सभी देवी-देवताओं को भी मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई है। मां दुर्गा का यह स्वरूप कमल पर विराजित है इनके हाथों में कमल, शंख, गदा और सुदर्शन चक्र हैं। देवी सिद्धिदात्री को मां सरस्वती का स्वरुप भी कहा जाता है। मां सरस्वती को ज्ञान की देवी के रूप में जाना व पूजा जाता है। आज मां सिद्धिदात्री की उपासना के साथ ही नवरात्रि का समापन किया जाता है। इसके लिए नवमी का पूजन व हवन किया जाता है। इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय से मां का पूजन किया जाना चाहिए।

मां सिद्धिदात्री उपासना मंत्र

सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।

सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

शुभ मुहूर्त

नवमी तिथि शुरू- 06 अक्टूबर को सुबह 10:54 बजे से

नवमी समापन- 07 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12:38 बजे

नवमी अभिजीत मुहूर्त- 7 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक

नवमी तिथि अमृत काल मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 24 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक

Prabhat Jain

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