Navratri 2018: ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न

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नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है| आज तापसिद्धि के लिए मां को प्रसन्न जाता है| ब्रह्मचारिणी  का अर्थ होता है ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली| यह मां का तपस्वी रूप है, जिसका अर्थ होता है ताप और चारिणी यानी तपमय जीवन जीने वाली देवी| किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्ति पाने के लिए आज मां की आराधना की जाती है|

मां ब्रह्मचारिणी को हिमालय और मैना की पुत्री कहा जाता है| प्राचीन कथाओं के अनुसार, कहा जाता है कि माता ने देवर्षि नारद के कहने पर ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने का प्रण लिया था| इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की थी| मां ने हजारों वर्षों तक केवल फलों का सेवन करके कठोर तपस्या की थी| इसके बाद भी जब भगवान प्रसन्न नहीं हुए तो उन्होंने तीन हजार वर्षों तक केवल पेड़ों की पत्तियां खाकर तप किया| इसी के बाद भगवान ब्रह्मा ने उन्हें मनोवांछित वरदान दिया था| माता की इस कठोर तपस्या के कारण ही उन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाने लगा| ऐसा मानते हैं कि यदि कोई भक्त आज के दिन मां की कठोर तपस्या करे तो उनकी मनोकामना पूरी होती है| तप, त्याग,वैराग्य, सदाचार और संयम की प्राप्ति के लिए मां की आराधना की जाती है|

ऐसे करें पूजा

ज्ञान और वैराग्य देने वाली मां को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सफेद वस्तुएं अर्पित करें| आज माता को मिश्री, शक्कर या पंचामृत का भोग लगाएं और हो सके तो पूजा के समय सफ़ेद वस्त्र ही धारण करें| दूध, दही, शक्कर, घृत और मधु से माता को स्नान कराने के बाद सफ़ेद फूल अर्पित करें| पूजा के समय माता का ध्यान लगाएं और नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें|

1.या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

2. दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू, देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ 

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