नारद पुराण : जन्म-मरण के चक्र से मिलेगी इस तरह मुक्ति

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हर व्यक्ति जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति पाना चाहता है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसे दोबारा इस संसार में जन्म न लेना पड़े अर्थात उसे मोक्ष प्राप्त हो जाए। हालांकि लोग मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाते लेकिन वे मोक्ष पाने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं भगवान की आरधना करते हैं और दान-धर्म जैसे कई पुण्य कार्य भी करते हैं फिर भी उन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। और वे संसार के जीवन-मरण के चक्र में उलझे रहते हैं। अगर आप भी मृत्यु के पश्चात मोक्ष पाना चाहते हैं और इस भव-सागर से पार उतरना चाहते हैं तो आपको नारद पुराण में बताये उपाय को एक बार जरूर आजमा लेना चाहिए।

जी हां नारद पुराण में मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है। दरअसल नारद पुराण में धर्मराज ने राजा भगीरथ को मोक्ष का मार्ग बताया था। उन्होंने राजा को बताया था कि किन कार्यों के करने से मनुष्य को मृत्यु के बाद दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता और उसे इस भव-सागर से मुक्ति मिल जाती है। नारद पुराण में बताए गए उपाय न तो अधिक कठिन हैं और न ही मुश्किल। इन उपाय को कोई भी व्यक्ति अपना सकता है और इस भाव सागर के बंधन से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है। चलिए जानते हैं कि नारद पुराण में मोक्ष प्राप्ति का क्या मार्ग बतलाया गया है।

नारद पुराण में मोक्ष प्राप्ति का जो पहला मार्ग दिखाया गया है उसमें वर्णिंत किया गया है कि एकादशी के दिन श्री हरी विष्णु की पूरे विधि-विधान से और सुगंधित पुष्पों से पूजा करनी चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है वह 10 हजार जन्मों के पापों से मुक्ति पा जाता है।

इसके अलावा नारद पुराण में बताया गया है कि श्री हरी विष्णु और देवाधिदेव-महादेव के समक्ष घी का दीपक जलाने से गंगा स्नान के सामान पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को भव-सागर से पार उतरने में मदद मिलती है। इसके अलावा पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति को जिस चीज़ को पाने की चाह होती है उस वास्तु का दान करने से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा भगवान विष्णु को तुलसी अत्यधिक प्रिय होती है। इसलिए उन्हें नियमित तुलसी का पत्ता चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

Prabhat Jain

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