चलिए उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर

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अनजाने में हुए पापों और दोषों से मुक्ति के लिए श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन सर्वमान्य हैं। कहा जाता है नागचंद्रेश्वर के दर्शन मात्र से ही सारे पापों से मुक्ति  मिल जाती है। श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन में स्थित है, जो प्रतिवर्ष नागपंचमी पर ही दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है।मान्यतानुसार नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन करने से दोषों का नाश होता है। ज्ञान से या अज्ञान से किया हुआ पाप धूमिल हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि नागचंद्रेश्वर के दर्शन से आरोग्य के साथ-साथ यश की भी प्राप्ति होती है।

ईशानेश्वर देवस्य तिष्ठतिशनभागतः।

तस्य दर्शनमात्रेण न स गच्छति दुष्कृतम्।।

मान्यता के अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है।

महाकाल मंदिर की ऊपरी पीठ पर ओंकारेश्वर महादेव स्थापित हैं| मंदिर के तीसरे खण्ड (मंज़िल) पर भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव की प्रतिमा है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार राजा इंद्र की सुधर्मा सभा में देवर्षि नारद मुनि कथा प्रसंग सुना रहे थे। तब देवराज इंद्र ने उनसे कहा – हे देवर्षि, आपने तो तीनों लोकों को देखा है, जाना है। कृपया मुझे बताएं कि इस पृथ्वीलोक पर ऐसा कौन सा स्थान है, जो सर्वोत्तम है, जो मुक्ति प्रदान करने वाला है? प्रत्युत्तर में नारदजी बोले – हे देवराज, पृथ्वी पर सबसे उत्तम स्थल प्रयाग है, लेकिन उससे भी दस गुना अधिक पवित्र और उत्तम महाकाल वन में अवंतिका है। वहां के दर्शन मात्र से सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नारद मुनि के वचन सुन इंद्रदेव सहित सभी देवगण विमानों में बैठ महाकाल वन स्थित अवंतिका पहुंचे। वहां पहुंचकर देवताओं ने देखा कि महाकाल वन में तो हर जगह करोड़ों शिवलिंग विराजमान हैं, इंच भर भी जगह खाली नहीं है। सभी जगह शिव निर्माल्य है और शिव निर्माल्य को लांघने के पाप के डर से सभी देवता स्वर्गलोक लौटकर जाने लगे।

तभी उन्होंने यह देखा कि एक दिव्य पुरुष प्रसन्नता से स्वर्ग की ओर जाता दिखाई दिया। तब देवताओं ने उससे पूछा, आप बड़ी प्रसन्नता से कहां जा रहे हैं? आपने कौन सा उत्तम कार्य किया है? उत्तर में दिव्य पुरुष ने जवाब दिया, “मैं महाकाल का भक्त हूं, मेरा नाम नागचंद्रेश्वर है। मुझे उनका गण होने का आशीर्वाद मिला है। देवताओं ने पूछा, वहां शिव निर्माल्य को लांघने से क्या तुम्हें दोष नहीं लगा। तब उसने बताया कि यहां ईशानेश्वर के ईशान कोण में एक लिंग है। उस लिंग का दर्शन करने से शिव-निर्माल्य को लांघने का ही नहीं अपितु समस्त दोष मिट जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर की बात सुन सभी देवता ईशानेश्वर के पास स्थित दिव्य लिंग का दर्शन करने पहुंचे। वहां पहुंच दर्शन करने से देवताओं के शिव निर्माल्य के साथ सभी पाप नष्ट हो गए। देवताओं को दिशा दी दिव्य पुरुष नागचंद्रेश्वर ने, इसलिए देवताओं ने उन महादेव का नाम नागचंद्रेश्वर रखा।उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर पटनी बाज़ार में स्थित है। यहां आने के लिए निजी वाहन के अलावा सिटी बस का विकल्प उपलब्ध है।

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