पी चिदंबरम की जेल पर ग्रहों का खेल

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पी चिदंबरम (P Chidambaram) का जन्म एक शाही परिवार में हुआ। उनके नाना को ब्रिटिशों द्वारा “राजा” के रूप में सम्मानित किया गया था। उनके माता-पिता ने तमिलनाडु के प्रसिद्ध अन्ना मलाई विश्वविद्यालय की स्थापना की और साथ ही उनके परिवार ने पूरे दक्षिण भारत में कई बैंकों, वित्तीय संस्थानों की स्थापना की। उनके पिता के पास चाय बागानों, खनन, रियल एस्टेट इत्यादि से लेकर कई व्यावसायिक उद्यम थे। फिर भी चिदंबरम ने वकील के रूप में अपना करियर बनाने का फैसला किया और भारत के सबसे अधिक मांग वाले वकील के रूप में स्थापित हुए |

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राजनीति में भी वह उस मुकाम पर पहुंचे , जिसके कुछ ही लोग सपने देख सकते थे और एक दशक से अधिक समय तक भारत के वित्त मंत्री और गृह मंत्री बने। और अब 74 साल की उम्र में, शाही जीवन जीने के बाद वह जेल है। यह सच है कि समय सर्वशक्तिमान है और अधिकांश राजा इसके खिलाफ असहाय महसूस करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जीवन में अचानक वृद्धि और गिरावट कुछ दशा अवधि में होती है। व्यक्ति के जीवन में नाटकीय घटनाओं के लिए शनि-शुक्र सबसे आम समय है। यह समय भिखारियों को राजाओं में बदल सकता है और साथ ही साथ भिखारियों को राजा बना सकता है।

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पी चिदंबरम के जीवन में भी यह शनि-शुक्र का समय महत्वपूर्ण मोड़ लाया है। शनि को अच्छे और बुरे कर्मो का सबसे बड़ा न्यायाधीश माना जाता है। यह शनि अपनी न्यायाधीश के भूमिका शुक्र के साथ मिल के उसके अंतर दशा में बढ़ी आसानी से निभाता है इसीलिए ऐसे कई उदहारण देखने में आते है जब व्यक्ति अर्श से फर्श पर या फर्श से अर्श पर पहुंच जाते है | पी चिदंबरम के अलावा आज के दिनों में रानू मंडल भी इसी दशा फल का एक उदहारण है | शनि शुक्र की इस दशा का और विवरण आगे के लेखो में |

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साभार – pictureastrology.com

 

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