Lunar Eclipse 2018: सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण

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आषाढ़ महीने की पूर्णिमा यानी 27 जुलाई को 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण होने वाला है| यह खग्रास चंद्रग्रहण है यानी पूर्ण चंद्रग्रहण| यह दुनियाभर के लिए एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है| यह 27 जुलाई की आधी रात से शुरू होकर 28 जुलाई तक चलेगा| इस चंद्रग्रहण के समय मंगल भी पृथ्वी के पास से होकर गुजरेगा इसलिए ज्योतिषाचार्य में ग्रहण के समय कुछ अनहोनी होने की आशंका जता रहे हैं| उनका कहना है कि ग्रहण के समय कोई बड़ा नुकसान हो सकता है|

1700 साल पहले हुआ था सबसे लंबा चंद्रग्रहण

दरअसल, लगभग 150 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब चंद्रमा इतने लंबे समय तक के लिए अदृश्य रहेगा| इस मामले पर खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक सबसे लंबा चंद्रग्रहण आज से 1700 साल पहले पड़ा था|

बाइबल में भी बताया घातक

ईसाई धर्म की धार्मिक किताब बाइबल में एक जगह इस चंद्रगहण को धरती के विनाश का संकेत माना गया है| ब्रिटेन की एक वेबसाइट में बाइबल में कही इन बातों का उल्लेख किया गया है|

ग्रहण का समय

चन्द्र ग्रहण 27 जुलाई को रात 11 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगा, जिसका  मध्यकाल रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा, जो 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर खत्म होगा| ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट की होगी|

यहां दिखेंगा चंद्रग्रहण

21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण भारत के सभी हिस्सों में दिखेगा, इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोपीय देशों व अंर्टाकटिका में भी इसे देखा जा सकता है| इस समय ब्लड मून भी दिखेगा| गौरतलब है कि यह ग्रहण के समय इस वर्ष का दूसरा ब्लड मून होगा| इसके पहले भी इसी साल ग्रहण के समय चंद्र ग्रहण में ब्लड मून दिखा था|

कब होता है ब्लू मून

जब सूरज और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो सूरज की किरण रुक जाती है| पृथ्वी के वातावरण की वजह से रोशनी मुड़कर चांद पर पड़ती है और इस वजह से यह लाल नजर आता है| जब भी पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है तभी ब्लड मून होता है| यानी चंद्रमा लाल दिखता है|

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