आइये आज जानते हैं ज्योतिष में चौथे भाव के बारे में

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चौथे भाव को ज्योतिष शास्त्र में केंद्र भाव माना जाता है केंद्र भाव का अर्थ होता है कि मानव जीवन के मुख्य समूह में से यह एक भाग है (Online Astrology)|  ज्योतिष में चौथा भाव कालचक्र की कुंडली में रात्रि के 12:00 बजे अर्थात मध्यरात्रि को दर्शाता है। यह वह समय है जब बाहरी गतिविधियां लगभग पूर्ण तरह शांत हो जाती है और ज्यादातर लोग निंद्रा अवस्था में होते हैं |

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मानव जीवन में अंतर्मन अर्थात बहुत गहरी सिटी भावनाएं एवं मन की गहराइयों को दर्शाता है (Online Astrology) | जीवन में शांति सुख और मानसिक स्थिरता के लिए इस भाव का शुभ प्रभाव में होना अत्यंत जरूरी है जब इस घर के क्रूर ग्रहों का प्रभाव होता है तो अक्सर जातक को उद्योग नेता मन में शांति और कभी-कभी नींद ना आने की संभावना रहती है।

चौथा भाव मानव जीवन में माता और जातक के उनसे संबंध को दर्शाता है। चौथा भाव और चंद्रमा दोनों अच्छे प्रभाव में होते हैं तो जातक का अपनी माता के साथ आजीवन संबंध अच्छा बना रहता है और माता का जीवन भी काफी अच्छा चलता है |

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चौथा घर हर तरह की अचल संपत्ति का द्योतक है इसके अंतर्गत आपके घर कामा जमीन और उनसे आने वाले लाभ भी होते हैं। किसी भी जातक की कुंडली में चौथे भाव और मंगल दोनों प्रभाव में होते हैं उनको जमीन घर किराए की आय इत्यादि की प्राप्ति बड़ी आसानी से हो जाती है |

चौथे भाव शिक्षा और आज के जमाने में किसी क्षेत्र में डिग्री प्राप्त करने से संबंधित भी माना जाता है| चौथे भाव और बुध और गुरु जब अच्छे प्रभाव में होते हैं तो जातक बड़ी आसानी से शिक्षा को प्राप्त करता है और अच्छे नंबरों से ग्रेजुएट भी होता है |

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साभार – Pictureastrology.com  

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