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जानें किस शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं करना चाहिए ग्रहण

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भगवान शिव की आराधना कई तरह की धातु से बने शिवलिंग से की जाती है। भक्त अपनी इच्छानुसार शिवलिंग का निर्माण करवाते हैं। शिवलिंग का निर्माण कहीं पाषाण, किहीं चीनी मिट्टी तो कहीं केवल मिट्टी से किया जाता है। इतना ही नहीं कहीं-कहीं तो पीतल, कांसे या चांदी जैसी धातुओं से भी शिवलिंग (Should Not Eat Shiv Prasad) का निर्माण करवाया जाता है।

हालांकि किसी भी धातु से बने शिवलिंग की पूजा करने से कोई बुराई नहीं है लेकिन क्या आप जानते हैं कि, हर शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाना चाहिए। यह बात जानकार आप चौंक जाएंगे कि, भोलेनाथ के हर स्वरुप पर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण नहीं (Should Not Eat Shiv Prasad) किया जा सकता है।

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भोलेनाथ की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करने के भी कुछ नियम होते हैं। अगर इन नियमों का पालन ठीक से न किया जाए तो इसके परिणाम बुरे भी हो सकते हैं। इसलिए जब भी भगवान भोलेनाथ की पूजा के बाद उनका प्रसाद ग्रहण करें तो इसकी जांच जरूर कर लें कि भगवान शिव के किस स्वरुप की पूजा की गई है और यह प्रसाद किस शिवलिंग पर चढ़ाया गया है।

तो चलिए जानते हैं कि किस शिवलिंग के प्रसाद को ग्रहण नहीं करना चाहिए (Should Not Eat Shiv Prasad) :

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दरअसल चंडेश्वर को शिव के प्रसाद का अंश माना जाता है। चंडेश्वर भूत-पिशाच के देवता कहे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को ग्रहण कर लिया जाए तो इससे चंडेश्वर नाराज हो जाते हैं और फिर हमे उनका कोपभाजन बनना पड़ता है। उनके कोप से बचने के लिए ही लोग प्रसाद ग्रहण नहीं करते। इसके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कुछ प्रसाद पर उनका अंश नहीं होता। शिव-महापुराण की मान्यता के अनुसार चंडेश्वर का अंश सिर्फ उसी प्रसाद में होता है जो प्रसाद मिट्टी, चीनी मिट्टी या साधारण पत्थर से बने शिवलिंग पर चढ़ाया गया हो। अगर इस तरह के शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाया गया है तो इसे ग्रहण करने से बचना चाहिए।

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जब भी आपको इस तरह का प्रसाद दिया जाए तो उसे बहती नदी में प्रवाहित कर दिया जाना चाहिए या फिर किसी साधू-संत को वह प्रसाद दिया जाना चाहिए। लेकिन यदि प्रसाद को पारद से बने शिवलिंग पर चढ़ाया गया है तो उसे जरूर ग्रहण करना चाहिए। इस प्रसाद में चंडेश्वर का अंश नहीं होता। इसके अलावा यदि प्रसाद शिव जी की प्रतिमा पर चढ़ाया गया है तो उसे भी आप बिना किसी डर के ग्रहण कर सकते हैं। प्रसाद ग्रहण करने से पहले इस बात को जांच लें की प्रसाद भगवान शिव के किस स्वरुप पर चढ़ाया गया है।

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