जानिए कुंडली का पांचवा भाव

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कुंडली का पांचवा भाव पुत्र कारक अथवा पुत्र भाव के नाम से जाना जाता है । इस नाम से स्पष्ट है कि यह भाव एक मनुष्य के पुत्र ,पुत्री अथवा बच्चों से संबंधित होता है। पांचवे भाव का कारक ग्रह गुरु अर्थात बृहस्पति को माना गया है। और बृहस्पति भी पुत्र का कारक माना जाता है इसलिए कुंडली में बृहस्पति और पांचवे घर पर शुभ दृष्टि मनुष्य के जीवन में पुत्र अथवा पुत्री के द्वारा सुख की प्राप्ति को दिखाता है।

पुत्र भाव के अलावा पांचवे भाव को पूर्व पुण्य का भाव भी कहा जाता है । ज्योतिष में यह विश्वास है कि किसी भी मानव को अपने संतानों की प्राप्ति अक्सर पूर्व पुण्यो के कारण ही होती है। इस भाव का मजबूत होना यह दिखाता है कि जातक अपने गत जन्मों के बहुत सारे पुण्य को इस जन्म में भोगने के लिए पैदा हुआ है । जिस किसी भी व्यक्ति की कुंडली में पांचवा भाव पांचवे भाव का स्वामी और कारक ग्रह यानि गुरु बलवान होता है उनकी जिंदगी में भाग्य और लक की कमी कभी नहीं होती।

यह भाव आपके विचारों और रुचि को भी दर्शाता है। किसी भी प्राणी को कला ,संगीत , नाट्य फिल्म जगत , गायन,  वादन इत्यादि किसी भी क्षेत्र में आगे आने के लिए पांचवे भाव का मजबूत होना अवश्यंभावी है। इसलिए आज के जमाने में फिल्म उद्योग और उससे जुड़े हुए किसी भी व्यवसाय में प्रसिद्धि पाने के लिए पांचवे भाव को देखा जाता है। पांचवे भाव में शुभ ग्रहों की दृष्टि शुभ ग्रहों का बैठना आपकी कुंडली को अति बलवान बनाने के साथ-साथ जिंदगी के सफर को अत्यंत ही आनंददायक और सरल बना सकने की क्षमता रखता है।

साभार – Pictureastrology.com  

 

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