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जाने किसे और कैसे मिलता है तीर्थ यात्रा का फल

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हर व्यक्ति कभी न कभी तीर्थ यात्रा पर जरूर जाता है। तीर्थ यात्रा पर जाने के पीछे उसका मकसद केवल पुण्य कमाना होता है। हर व्यक्ति इस भाव सागर से पार जाने के लिए भगवान की शरण यानी तीर्थ यात्रा पर जाता है। लेकिन कई बार लोगों को तीर्थ यात्रा का फल नहीं मिलता। तीर्थ यात्रा पर जाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है तभी उसका शुभ फल हमे प्राप्त होता है। पौराणिक तथ्यों के अनुसार जानते हैं कि किसे और कैसे मिलता है तीर्थ यात्रा का शुभ फल।

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5 पौराणिक तथ्य

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जब भी हम तीर्थ यात्रा पर जाते हैं तब तीर्थ क्षेत्र में स्नान, दान, जप जैसी चीज़ें करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ऐसा नहीं करता तो वह पाप का भागीदार बनता है। ऐसे में उसे कोई शुभ फल तो नहीं मिलता जबकि उस पर दोष जरूर लग जाता है।

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पौराणिक तथ्य कहते है कि जीवन में किए गए पाप तीर्थ स्थान पर जाकर नष्ट हो जाते हैं। लेकिन यदि तीर्थ क्षेत्र में यदि कोई पाप किया जाए तो उससे छुटकारा नहीं पाया जा सकता।

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जब भी कोई व्यक्ति अपने लिए नहीं बल्कि अपने माता-पिता, भाई, परिजन अथवा गुरु को फल मिलने के उददेश्य तीर्थ क्षेत्र में स्नानादि करता है तो उस व्यक्ति को स्नान के फल का 12वां भाग मिल जाता है।

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अगर कोई व्यक्ति तीर्थ यात्रा करने के लिए दूसरे के धन का इस्तेमाल करता है तो उसे तीर्थ यात्रा के पुण्य फल का सौलहवां भाग ही प्राप्त होता है।

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अगर आपको तीर्थ यात्रा का पूर्ण रूप से फल चाहिए तो आपको किसी भी आत्मा को जाने या अनजाने में जरा भी कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। वहीं यदि व्यक्ति का आचार, विचार, आहार, व्यवहार और संस्कार शुद्ध और पवित्र हो तो उसे जरूर ही तीर्थ यात्रा का फल प्राप्त होता है।

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