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आइए जानते हैं कुंडली के नौवें भाव के बारे में 

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कुंडली में नवे भाव को भाग्य स्थान के नाम से जाना जाता है | मनुष्य के भाग्य के साथ-साथ यह भाव मनुष्य की धार्मिकता, उसके परिवार के प्रति समर्पण, अपने पूर्वजों से उसके संबंध और समाज और परिवार के सभी वरिष्ठ जनों के साथ जातक के संबंधों की भी जानकारी इस भाव से मिलती है (Ninth House Planets)| इस भाव ,में शुभ ग्रहों की दृष्टि मनुष्य को सरकारी क्षेत्र में उच्च पदस्थ अधिकारियों से राजनेताओं से बड़ी कंपनी के डायरेक्टरों अधिकारियों मालिकों इत्यादि उच्च पदस्थ लोगो के साथ अच्छे संबंध की द्योतक है |

आइए जानते हैं कुंडली के आठवें भाव के बारे में 

नवे भाव में अगर मजबूत ग्रहों का प्रभाव होता है तो मनुष्य की जीवन में उन्नति आसान हो जाती है और वह एक के बाद एक आसानी से सफलता के शिखर प्राप्त कर सकता है (Ninth House Planets)| इस भाव को पित्र भाग्य के नाम से भी जाना जाता है अर्थात इससे आपके पिताजी और पूर्वजों के भाग्य और उनकी अवस्था का भी पता लगता है | कुंडली में अक्सर ज्योतिष जब पितृदोष को देखते हैं तब उसमें नवे भाव का विशेष महत्व होता है |

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इस भाव में अगर किसी भी तरह की कमजोरी हो तो यह आपके परिवार में एवं पूर्वजों के साथ किसी समस्या को दर्शाता है नवी भाव के मुख्य कारक के रूप में सूर्य और गुरु ग्रह को माना जाता है और इन दोनों की पूजा अर्चना एवं मंत्रोच्चार से आपने वैभव को मजबूत कर सकते हैं|

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     साभार – Pictureastrology.com  

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