Ganesh Chaturthi 2019 : गणेशजी को भूलकर भी न चढ़ाए तुलसी, जानिए कारण

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आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2019)  का त्योहार बड़े ही जोरों-शोरों से मनाया जा रहा है। सभी जगह बप्पा के आगमन की खुशियाँ मनाई जा रही है। ढ़ोल-नगाड़ों के साथ आज पंडालों में, घरों में भगवान गणेश की स्थापना की जा रही है। गणपती को प्रसन्न करने के लिए भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं, भगवान की आराधना करते हैं, लेकिन गणेश पूजा के दौरान यदि आपने एक गलती कर दी तो लंबोधर आपसे खुश नहीं बल्कि नाराज हो जाएँगे।

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गणेश पूजा में न चढ़ाए तुलसी

ऐसा कहा जाता है कि गणेश पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए, नहीं तो भगवान गणेश नाराज हो जाते हैं। वहीं पुरानों में कहा गया है कि भगवान विष्णु, कृष्ण और राम सहित अन्य देवताओं को लगाये जाने वाले भोग में तुलसी का होना जरूरी है। आइये जानते हैं की सिद्धि विनायक गणराज को आखिर क्यू नहीं चढ़ाई जाती है तुलसी (Ganesh Chaturthi 2019)।

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पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश गंगा के तट पर कठिन तपस्या कर रहे थे। उसी दौरान देवी तुलसी भी अपने घर से तीर्थ यात्रा पर निकली थीं। उन्होंने गणेश को कठिन तपस्या करते हुए देखा। देवी तुलसी गणेश के रुप को देखकर इतनी मोहित हो गईं कि उन्होंने गणेश के सामने अपने विवाह का प्रस्ताव रखते हुए उनकी तपस्या भंग कर दी। तपस्या भंग होने के बाद जब गणेश भगवान ने अपनी आंखें खोली तब उन्होंने तुलसी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि मैं ब्रह्मचारी हूं और आजीवन विवाह नहीं करुंगा।

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इसके बाद देवी तुलसी भी गणेश से रुष्ट हो गईं और उन्होने गणराज को श्राप दिया कि तुम्हारा एक नहीं बल्कि दो विवाह होगा वहीं गणेश भगवान ने भी तुलसी को श्राप दिया कि तुम्हारा विवाह किसी असुर से होगा। इतना सुनने के बाद तुलसी का गुस्सा शांत हुआ और भगवान के सामने गिरगिड़ाई। गणेश ने वरदान दिया कि तुम भगवान विष्णु और कृष्ण की प्रिया कहलाओगी और कलयुग में तुम्हें जीवन एवं मोक्ष की देवी माना जाएगा, लेकिन श्राप के कारण पहले असुर से विवाह होगा। इसीलिए बाद में तुलसीजी का विवाद शंखासुर से हुआ, जिसका भगवान शिव ने वध किया था इसीलिए भगवान शिव को शंख से जल अर्पित नहीं करते हैं।

 

 

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