डोल ग्यारस: करें भगवान विष्णु की पूजा और रखें व्रत

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भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर डोल ग्यारस मनाया जाता है। इस वर्ष एकादशी 20 सितंबर गुरुवार को है। शास्त्रों में एकादशी का सर्वाधिक महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और उनके आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इसे परिवर्तनी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि चातुर्मास के दौरान अपने शयनकाल में भगवान विष्णु करवट बदलते हैं।

डोल ग्यारस के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है। इस दिन राजा बलि से भगवान विष्णु ने वामन रूप में उनका सर्वस्व दान में मांग लिया था एवं उसकी भक्ति से खुश होकर अपनी एक प्रतिमा राजा बलि को सौंप दी थी। इस वजह से इसे वामन एकादशी भी कहा जाता है। यह पद्मा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। पद्मा माता लक्ष्मी का एक नाम है। इस दिन जो भी व्यक्ति एकादशी का व्रत करता है। उस पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है।

डोल ग्यारस – क्या उपाय करें

– जीवन में उन्नति के लिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंदिर में एक साबुत श्रीफल और बादाम चढ़ाना चाहिए।

– अगर कर्ज से परेशान है, तो एकादशी के दिन पीपल के पेंड की जड़ में शक्कर डालकर जल अर्पित करना चाहिए और शाम के वक्त पीपल के नीचे दीपक लगाना चाहिए।

– एकादशी की रात्रि में घर में या किसी विष्णु मंदिर मे नौ बत्तियों वाला दीपक लगाएं।

– एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन करते वक्त कुछ सिक्के उनके सामने पूजा में रखें। पूजा के बाद सिक्के लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपने पर्स या तिजोरी में हमेशा रखें। इससे धन के भंडार भरने लगेंगे।

– जिन युवक-युवतियों के विवाह नहीं हो पा रहे है, उन्हें एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले पुष्पों की माला चढ़ानी चाहिए।

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