स्वयं हनुमान आते हैं यहां अपने भक्तों का इलाज करने

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कलयुग में भी इस धरती पर भ्रमण करने वाले भगवान हनुमान अपने भक्तो का संकट पल भर में हर लेते हैं। अपने इष्ट श्रीराम से अजर अमरता का वरदान प्राप्त किए श्री हनुमानजी के अनेक रूप हैं। वे अपने भक्तों संकट में पा कर किसी भी रूप में अपने भक्त की सहायत के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसा ही एक स्थान है मध्यप्रदेश के ग्वालियर से करीब 70 किलोमीटर दूर उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे भिंड जिले के ‘दंदरौआ सरकार धाम’। यहां राम भक्त हनुमान स्वयं अपने भक्तों का इलाज करने डॉक्टर के रूप में आते हैं। इतना ही नहीं यहां आए रोगियों के कैंसर जैसे असाध्य रोग भी ठीक हो चुके हैं। मान्यता है कि रोगों के लिए हनुमान जी की भभूत बहुत कारगर है। विशेष रूप में फोड़ा, अल्सर और कैंसर जैसी बीमारियां भी मंदिर की पांच परिक्रमा करने पर ठीक हो जाती हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार एक साधु शिवकुमार दास को कैंसर था। उसे हनुमान जी ने मंदिर में डॉक्टर के वेश में दर्शन दिए थे। वे गर्दन में आला डाले आए थे, जिसके बाद साधु पूरी तरह स्वस्थ हो गया। ‘दंदरौआ सरकार धाम’ एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान डॉक्टर के रूप में पूजे जाते हैं। साधु शिवकुमार दास का कैंसर ठीक होने के बाद से मान्यता है कि इस मंदिर के हनुमान स्वयं अपने एक भक्त का इलाज करने डॉक्टर बनकर पहुंचे थे।

‘दंदरौआ सरकार धाम’ से भक्तो की अटूट श्रद्धा जुडी है। बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं और अपने असाध्य रोगों से मुक्ति पाते हैं। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर उनका बचना बहुत मुश्किल था अगर उस समय वह हनुमानजी ना होते। हनुमानजी ने संजीवनी लाने के लिए सागर लांघ दिया और पर्वत उठा लाये।

उसी प्रकार कलयुग में भी भिंड जिले के ‘दंदरौआ सरकार धाम’ में हनुमान जी अपने भक्तो का रोग दूर करते हैं। 300 साल पहले हनुमानजी की यह मूर्ति नीम के पेड़ से छुपी हुई थी। पेड़ को काटने पर गोपी वेषधारी हनुमानजी की ये प्राचीन मूर्ति प्राप्त हुई थी। तब से मूर्ति की पूजा-अर्चना शुरू की गई।यहां एक मात्र नृत्य करते हुए हनुमानजी की मूर्ति है।

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