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अगले 8 दिनों तक न करें कोई शुभ काम, जानें क्यों

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होली नज़दीक हैं, और आज से होलाष्टक और खरमास की शुरुवात हो रहीं हैं।  होलाष्टक का समय होली के 8 दिन पूर्व से मन जाता हैं। होली इस बार 21 मार्च को मनाई जाएगी और होलिका दहन 20 मार्च को होगा। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक माना जाता है, जिसके अनुसार आज से होलाष्टक शुरू होकर 21 मार्च यानि होली के दिन तक रहेंगे। होलाष्टक के इस समय को हिंन्दू धर्म शास्त्रों में अशुभ माना जाता हैं। अर्थात इन 8 दिनों में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य उदय के साथ ही नई तिथि की शुरुआत होती हैं| इसलिए 14 मार्च से होलाष्टक शुरू हो रहे हैं, जिनका दोष पूरा सप्ताह रहेगा। होली के रंग की शुरुआत 17 मार्च की आमलकी एकादशी से होगी|होली की ध्वज स्थापना भी आमलकी एकादशी के दिन हो जाएगी।  जबकि होलीका दहन 20 मार्च की रात को होगा और होली का रंग 21 मार्च को खेला जाएगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी के दिन सूर्योदय से पहले सूर्यदेव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। अगर हिन्दू ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसकी गणना की जाए तो  संक्रांति 14 मार्च को होगी, लेकिन चूंकि पुण्यकाल 15 मार्च से माना जा रहा है।  होली के रंग की शुरुआत 17 मार्च को एकादशी से होगी।

एकादशी वाले दिन ही होली के ध्वज की स्थापना हो जाएगी। होलिका दहन 20 मार्च की रात किया जाएगा, चूँकि इस साल 20  मार्च को संपूर्ण प्रदोषकाल भद्रा से युक्त हैं, इस दिन भद्रा का दोष रात्रि 08:58 पर समाप्त होगा, अर्थात होलिका दहन का महूर्त 08:58 के बाद ही रहेगा। हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,  होलाष्टक के दौरान प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह मंद हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा चरम पर होती हैं, इसलिए होलाष्टक में कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए।

-श्रृंखला

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