तंत्र साधना की रात होती है दिवाली

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दिवाली को हिंदू धर्म में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। वहीं दिवाली की रात यानी कार्तिक माह की अमावस्या को कई जगह तंत्रसाधना की जाती है। कई तांत्रिक इस रात अपनी सिद्धियों को सिद्ध करने के लिए कठिन साधना करते हैं। लेकिन दिवाली का पावन पर्व सुख-समृद्धि का त्यौहार है। दिवाली की रात को कालरात्रि, महानिशा, दिव्यरजनी और महाकृष्णा भी कहा जाता है। तंत्र शास्त्र में कुछ विशेष दिनों का वर्णन किया गया है। इन विशेष दिनों में तंत्र साधना करने से इसका विशेष फल प्राप्त होता है। लेकिन सभी विशेष दिनों में दिवाली की रात सबसे ज्यादा शक्तिशाली मानी जाती है। इसी वजह से आज की रात तंत्र साधना करने वाले तांत्रिकों और अघोरियों के लिए सबसे ख़ास होती है।

इस दौरान तांत्रिक और अघोरी बेहद कठिन साधना करते हैं। उनकी इस साधना के बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती। तंत्र विद्या और काले जादू का जिक्र मुग़ल शासन काल में भी मिलता है। मुंशी फ़ैज़उद्दीन देहलवी द्वारा साल 1885 में मुगलों के काल के बारे में ‘बज़्म-ए-आखिर’ नाम से एक किताब छापी गई थी। इसमें भी दिवाली की रात तंत्र साधना का जिक्र किया गया है। वहीं काले जादू से बचने के लिए मुगल अपने कर्मचारियों को दिवाली के दिन महल परिसर से बाहर जाने की इजाजत नहीं देते थे। सब्जियां भी दिवाली से पहले ही मंगवाई जाती थीं। इतना ही नहीं महल के अंदर इस दिन अगर कोई बैंगन, कद्दू, चुकंदर या गाजर खाने की इच्छा रखता था तो इन्हें अच्छे से साफ़ कर उसके बाद छीलकर इस्तेमाल किया जाता था। मुगल शासकों का मानना था कि कोई भी बाहरी व्यक्ति इन सब्जियों के माध्यम से महल के हराम की औरतों पर काला जादू कर सकता है।

आज के दिन किए जाने वाले तांत्रिक अनुष्ठानों में वूडू ब्लैक मैजिक का भी बेहद महत्व है। ये साधना काला जादू प्राप्त करने और काली शक्तियों को बस में करने के लिए की जाती है। ये काला जादू किसी का अनिष्ट करने और अपने शत्रुओं का सर्वनाश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि तेजी से दौर बदला और लोगों में शिक्षा के साथ-साथ जागरूकता बढ़ी तो लोगों का इन चीज़ों में विशवास कम हुआ। लेकिन आज भी कई ऐसे पिछड़े समुदाय है या कुछ विशेष तबके हैं जो तंत्र साधना करते हैं।

आज की रात कई विशेष प्रकार की शक्तियां प्राप्त करने के लिए तंत्र साधना की जाती है। इन सिद्धियों में बगलामुखी साधना, उच्चाटन और स्तंभन जैसी सिद्धियां मुख्य हैं। ये सिद्धियां कोर्ट में केस जीतने, शत्रु पर विजय प्राप्त करने या फिर किसी को अपने बस में करने के लिए हासिल की जाती हैं। यहां ये जानना बेहद जरूरी है कि तंत्र साधना और काला जादू में बेहद अंतर है। दिवाली की रात कर्णपिशाचिनी विद्या सिद्ध करने का सबसे उपयुक्त दिन होता है। यह ऐसी विद्या है जो साधक के कान में आकर किसी भी व्यक्ति के भूत-भविष्य को बता सकती है।

Prabhat Jain

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