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Dhanteras 2019 : धनतेरस पर क्यों खरीदा जाता है सोना?

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भारत त्योहारों का देश का है और भारत में हर त्यौहार की कुछ न कुछ मान्यता है। हिन्दू धर्म में हर त्यौहार से जुड़ी कुछ न कुछ पौराणिक कथाएं भी होती हैं। दीपावली का पर्व हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस त्यौहार में कुछ ही दिन का समय शेष रह गया है। दिवाली (Diwali 2019) को लेकर हर कोई तैयारियों में जुटा हुआ है। चारों तरफ महीनों पहले से ही दिवाली की धूम मच जाती है। बाजार में रौनक दिखाई देने लगती हैं। पटाखों, मिठाइयों, कपड़ों और लाइट्स की दुकाने जगमगाने लगती हैं। वैसे इस बार 5 दिवसीय दीपावली का महापर्व 25 अक्टूबर से शुरू होगा जो 29 अक्टूबर तक चलेगा (Dhanteras 2019)।

Dhanteras 2019 : क्यों मनाया जाता है धनतेरस का पर्व?

25 अक्टूबर को धनतेरस के साथ दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाएगी। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि धनतेरस पर बर्तन, सोने-चांदी के आभूषण और कई अन्य तरह की खरीददारी करना बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर त्यौहार का शुभ मुहूर्त जरूर होता है (Dhanteras 2019)। अगर शुभ मुहूर्त में पूजा या फिर खरीदारी की जाए तो इसका फल भी ज्यादा शुभ होता है। यह तो सभी जानते ही हैं लेकिन क्या आपको ये पता है कि आखिर धनतेरस पर सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना क्यों जरूरी है? या ऐसा क्या कारण है जिसकी वजह से धनतेरस के दिन सोना खरीदने की परंपरा चली आ रही है? अगर आप नहीं जानते तो आज हम आपको उसी पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिस वजह से ये परंपरा शुरू हुई।

दरअसल पौराणिक कथा के अनुसार हिम नामक राजा के बेटे के श्राप से धनतेरस का पर्व जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में बताया गया है कि राजा हिम के बेटे को श्राप मिला हुआ था कि उसकी मृत्यु उसकी शादी के चौथे दिन हो जाएगी। इस बात का पता जब राजकुमार की पत्नी को चला तो उन्हें अपने पति की जान बचाने की एक योजना बनाई। राजकुमार की पत्नी ने शादी के चौथे दिन राजकुमार को रात भर जागने के लिए कहा (Dhanteras 2019)। इस दौरान राजकुमार की पत्नी ने घर के दरवाजे पर सोने-चांदी व अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रख दी। इतना ही नहीं उन्होंने घर के सभी द्वार पर दिए जलाए। इसके बाद उन्होंने राजकुमार को रात भर गीत और कहानियां सुनाई ताकि वे जाग सकें और उन्हें नींद न आ जाए।

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राजकुमार को मिले श्राप के अनुसार जब मृत्यु के देवता यमराज उनके प्राण हरने सांप के रूप में महल पहुंचते तो घर के अंदर प्रवेश ही नहीं कर सके। इसके पीछे कारण था कि वे स्वर्ण आभूषणों और दीपों की चमक से अंधे हो गए। यमराज इस चकाचौंध की वजह से वहीं आभूषणों के ढेर पर बैठ गए और राजकुमार की पत्नी द्वारा सुनाए जा रहे गीत व कहानी सुनते रहे। जब सुबह हुई तो राजकुमार की मृत्यु की घड़ी बीत चुकी थी। इसी वजह से यमराज को बिना उनके प्राण लिए वहां से जाना पड़ा। तभी से धनतेरस का पर्व मनाया जाने लगा और इस दिन सोना खरीदने की परम्परा आरम्भ हुई।

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Prabhat Jain

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