Dhanteras 2019 : धनतेरस पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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दिवाली (Diwali 2019) से दो दिन पहले त्रयोदशी या धन त्रयोदशी मनाई जाती है। त्रयोदशी या धन त्रयोदशी को धनतरेस (Dhanteras 2019) भी कहा जाता है। इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि, मृत्यु के देवता यम, धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी और वैभव के स्वामी कुबेर की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली (Dhanteras 2019 Shubh Muhurat) पर माता लक्ष्मी के आह्वान के पहले यम को प्रसन्न करने और आरोग्य की प्राप्ति के लिए कर्मो की शुद्धिकरण करना बेहद आवश्यक है। कुबेर वैभव के स्वामी होने के साथ यह आसुरी प्रवत्तियों का हरण करने वाले देवता है। वहीं आरोग्य के देवता धन्वंतरि और मां लक्ष्मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था।

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धन्वंतरि और मां लक्ष्मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। दोनों ही कलश लेकर अवतरित हुए थे (Dhanteras 2019 Shubh Muhurat)। धन्वंतरि को दुनिया का सबसे बढ़ा वैद्य कहा जाता है और उन्हें देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है उनके द्वारा बताए गए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उपाय अपनाने से हर रोग से छुटकारा मिलता है। धनतेरस (Dhanteras 2019) मानाने के पीछे उद्देश्य उनके उपायों को अपनाना है। धन्वंतरि की पूजा करने से निरोगी काया और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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धनतेरस 2019 शुभ मुहूर्त

धनतेरस मुहूर्त –  शाम 07:10 बजे से लेकर 08:15 तक

कुल अवधि – 1 घंटे 5 मिनट

प्रदोष काल – 17:42 बजे से 20:15 बजे तक

वृषभ काल :18:51 बजे से 20:47 बजे तक

धनतेरस मानाने का कारण

दरअसल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। उनके हाथ में अमृत कलश था। इसलिए इस दिन को धनतेरस (Dhanteras 2019) के रूप में मनाया जाता है और आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा कर निरोगी काया की कामना की जाती हैं। वहीं चूंकि धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है (Dhanteras 2019 Shubh Muhurat)।

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पूजन विधि –

धनतेरस (Dhanteras 2019) के दिन नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदना चाहिए। इन नवीन झाडू एवं सूपड़ा की पूजा करनी चाहिए। शाम के वक़्त दीपक जलाएं और उन्हें घर, दुकान ऑफिस के द्वार वह हर कौन में रखें। इसके अलावा इस दिन मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीप प्रज्ज्वलित कर रखना चाहिए। इसके अलावा धनतेरस पर तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन और आभूषण खरीदना शुभ होता है। प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआं, मंदिर आदि स्थानों 3 दीपक जलाकर रखना चाहिए। वहीं शुभ मुहूर्त में पूजा कर घर व दुकान में दीपक रखना चाहिए। भगवान धन्वंतरि पूजा से तात्पर्य है अपने आसपास के वातावरण की साफ़-सफाई रखना।

Prabhat Jain

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