आइए आज जानते हैं ज्योतिष के छठे भाव के बारे में

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ज्योतिष में छठा भाव रोग, ऋण और शत्रु का भाव कहा जाता है| एक शब्द में इसे रिपु भाव की संज्ञा भी दी गई है| इसलिए इस भाव से ज्यादातर नकारात्मक चीजों का ही नाता रहा है और कुछ हद तक ये बात सच भी है क्योंकि यह भाव आपके जीवन में आने वाली कठिनाइयों और परेशानियों को दर्शाता है|

यह भाव दिखाता है कि कितनी मुसीबतें और किस तरह के दुश्मनों का सामना आपको अपने जीवन में करना पड़ेगा | अगर इस भाव में या इस भाव के अधिपति शुभ अवस्था में कुंडली में पाए जाते हैं तो मानव जीवन में कठिनाइयां कम आती हैं और व्यक्ति आसानी से सफलता प्राप्त करता है परंतु यदि इस भाव में ग्रहों का सहयोग होता है तो मानव कठिनाइयों से जूझता हुआ उन पर विजय प्राप्त करके आगे बढ़ता है |

छठे भाव का संयोग कोर्ट कचहरी और कानून से जुड़े हुए क्षेत्रों से भी होता है | अक्सर इस भाव में अगर गुरु या बुध जैसे शुभ ग्रहों का सहयोग होता है तो मनुष्य अच्छा वकील या न्यायाधीश भी बनता है | छठे भाव का हर तरह के पुलिस मिलिट्री सेना से जुड़े हुए व्यवसाय से भी संबंध हमेशा रहा है | छठे भाव में मंगल, शनि या राहु केतु और सूर्य जैसे ग्रहों की स्थिति या उनका प्रभाव मनुष्य को किसी न किसी रूप में सेना या पुलिस से जुड़े हुए क्षेत्र में कार्य करने की क्षमता प्रदान कर सकता है | इसमें अगर सूर्य भी मजबूत हो तो मनुष्य मिलिट्री या सेना में काफी उच्च पद पर रिटायर होते हैं |

काफी ज्योतिष छठे भाव में प्रस्तुत ग्रहों की स्थिति को देखकर मनुष्य के जीवन में होने वाले रोगों के बारे में भी आसानी से जानकारी पता कर सकते हैं | जैसे कि अगर छठा भाव और बुध की स्थिति खराब हो तो त्वचा के रोग होना स्वाभाविक होता है | इस तरह कुंडली का छठा भाव न केवल नकारात्मक चीजों से जुड़ा हुआ है परंतु आपके जीवन में उन नकारात्मकता से उबरने की क्षमता को भी दर्शाता है|

       साभार – Pictureastrology.com  

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