जानिए, श्राद्ध के बारे में अलग-अलग धर्मग्रंथों में क्या बातें कही गई हैं

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आज से शुरु हो चुके पूर्णिमा से अमावस्या तक के 15 दिन पितरों के दिन कहे जाते हैं। इन 15 दिनों तक पितरों को याद किया जाता है, उनका तर्पण किया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।  हिंदू धर्म में पितृपक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का काफी महत्व है। इस साल 24 से 8 अक्टूबर तक श्राद्धपक्ष रहेगा। जिस तिथि को पितरों का देहांत होता है, उसी दिन पितरों का श्राद्ध किया जाता है। बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि दुनिया में सबसे पहले श्राद्ध किसने किया था। आइये जानते हैं श्राद्ध पक्ष से लेकर जुड़ी कुछ बातें।

महाभारत के अनुशासन पर्व में भी भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के संबंध में कई ऐसी बातें बताई हैं, जो वर्तमान समय में बहुत कम लोग जानते हैं। महाभारत के अनुसार, सबसे पहले महातपस्वी अत्रि ने महर्षि निमि को श्राद्ध पक्ष के बारे में उपदेश दिया था। इसके बाद महर्षि निमि ने श्राद्ध करना शुरू कर दिया। महर्षि को देखकर अन्य ऋषि-मुनि भी पितरों को अन्न देने लगे। लगातार श्राद्ध का भोजन करते-करते देवता और पितृ पूर्ण तृप्त हो गए, लेकिन श्राद्ध का भोजन लगातार करने से पितरों को अजीर्ण रोग हो गया और इससे उन्हें कष्ट होने लगा। तब वे ब्रह्माजी के पास गए और उनसे कहा कि श्राद्ध का अन्न खाते-खाते हमें अजीर्ण रोग हो गया है, इससे हमें कष्ट हो रहा है, कृपया आप कोई उपाय बताइये।

तब ब्रह्माजी बोले- मेरे निकट ये अग्निदेव बैठे हैं, ये ही आपका कल्याण करेंगे। अग्निदेव ने देवताओं और पितरों को कहा कि अब से श्राद्ध में हम सभी साथ में भोजन करेंगे, जिससे आप को अजीर्ण रोग नहीं होगा। इसके बाद से ही सबसे पहले श्राद्ध का भोजन पहले अग्निदेव को दिया जाता है, उसके बाद ही देवताओं और पितरों को दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, अग्नि हर चीज को पवित्र कर देती है। पवित्र खाना मिलने से देवता और पितर प्रसन्न हो जाते हैं।

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