इस वर्ष भी 2 दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी

0

द्वापर युग में भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कारागार में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। तब से आज तक हर वर्ष भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे जन्माष्टमी भी कहा जाता है। ‘कृष्ण’ मूलतः एक संस्कृत शब्द है, जो ‘काला’, ‘अंधेरा’ का समानार्थी है। यदि भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है| इसे जन्माष्टमी के साथ-साथ जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

हिन्दू कैलेंडर या पंचांग के अनुसार, अधिकतर कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग-अलग दिनों पर हो जाती है।  जब-जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त सम्प्रदाय के लोगों के लिए और दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए होती है। हर बार ऐसा होने पर भक्तों में असमंजस बना रहता है कि किस दिन श्रेष्ठ योग में जन्माष्टमी मनाई जाए। आइये जानते हैं कि इस बार कब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ होगा।

इस बार जन्माष्टमी 3 सितंबर को आ रही है। इस दिन भक्तों द्वारा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान् श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है एवं व्रत उपवास भी रखा जाता है। जो लोग जन्माष्टमी से एक दिन पहले उपवास रखते हैं, वे केवल एक ही समय भोजन करते हैं। भक्त पूरे दिन उपवास रखकर अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के खत्म होने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। श्री कृष्ण पूजा निशीथ समय यानी मध्यरात्रि में की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान् ने मध्यरात्रि में ही जन्म लिया था, इसी कारण आज भी उनकी पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान के साथ मध्यरात्रि में ही की जाती है।

इस वर्ष आ रही जन्माष्टमी के मुहूर्त की बात करें तो 2 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:47 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो  3 सितंबर, 2018 को सायंकाल 17:19 बजे तक समाप्त हो जाएगी। जब-जब जन्माष्टमी 2 दिनों की हो जाती है, तब इस अंतर को समझने के लिए एकादशी उपवास एक अच्छा उदाहरण है। अतः अलग-अलग अनुयायियों द्वारा अपनी श्रद्धा के अनुसार जन्माष्टमी मनाई जाती है।

Share.