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अगर आपकी जॉब रोटेशनल या नाईट शिफ्ट की है तो हो जाए सावधान

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प्राइवेट कंपनियों में रोटेशनल शिफ्ट यानी चौबीसों घंटे काम करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए बड़ी संख्या में लोगों को नाइट शिफ्ट (Night Shift Work) में काम करना पड़ता है या फिर हर हफ्ते उनकी शिफ्ट और शेड्यूल बदलते रहते है। मतलब कभी मॉर्निंग शिफ्ट तो कभी इवनिंग तो कभी नाइट (Mental Disease)। ऐसे में अगर आप भी इस तरह के शेड्यूल में काम करते हैं तो न सिर्फ आपको मोटापा और डायबीटीज का जोखिम अधिक है बल्कि यह बदलती शिफ्ट आपको मानसिक रोगी भी बना सकती है।

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एक शोध के अनुसार नाइट शिफ्ट (Mental Disease) में काम करने वाले लोगों में सुबह की शिफ्ट में वर्किंग लोगों की अपेक्षा ज्यादा तनाव होता है. शोधकर्ताओं ने इस सिलसिले में पहले प्रकाशित हो चुकी 7 अध्ययनों में भाग लेने वाले 28,438 लोगों के काम के घंटों और उनकी मानसिक सेहत का गहराई से अध्ययन किया जिसमें यह बात सामने आई है. नाइट शिफ्ट में काम करने वाले 33 फीसदी लोगों में अवसाद और चिंता के लक्षण देखने में आते हैं बजाए कि उन लोगों के जो दिन की शिफ्ट में काम करते हैं.

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विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से हमारे सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है। हमारा शरीर सोने-जागने की आदत में बार-बार हो रहे इस बदलाव को नहीं झेल पाता जिससे लोगों में चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसके अलावा मूड स्विंग होना और सामाजिक अलगाव का कारण भी बनता है जिससे परिवार और दोस्तों से रिश्ते प्रभावित होने लगते हैं।
इस स्थिति से बचने के लिए व्यायाम के लिए समय निकालने, दिन के उजाले के दौरान बाहर जाने और परिवार-दोस्तों के साथ समय बिताने से सामाजिक अलगाव को सीमित करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है।

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-Mradul tripathi

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