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उम्र बढ़ने पर इस वजह से फीकी पड़ने लगती हैं यादें

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हमारा दिमाग काफी कुछ चीज़ों को याद रखता है और वक़्त बीतने के साथ भी उसे भूलता नहीं है। जबकि कई बार कुछ समय पहले की बात ही हमे याद नहीं रहती। आखिर ऐसा क्यों होता है कि हमे कुछ दिन पहले की बात तो याद नहीं लेकिन सालों पुरानी कई बातें याद रह जाती हैं। हालांकि वक़्त के साथ-साथ यादें धुंधली पड़ जाती हैं लेकिन उन्हें पुनः याद कर फिर से ताजा किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि इसके पीछे आखिर कौन सा विज्ञान है।

मानव स्मृति को लेकर शोधकर्ताओं ने कई शोध किए हैं जिसमें इस बात का पता चला है कि व्यक्ति जिस भी अनुभव से गुजरता है तो उसका अनुभव एक विद्युत ऊर्जा की एक नाड़ी में बदल जाता है। फिर यह न्यूरॉन्स के एक नेटवर्क के साथ यात्रा करती है। सबसे पहले हमारी अनुभवी जानकारी यात्रा करते हुए हमारी अल्पकालिक स्मृति में पहुंचती है। यहां कुछ मिनटों के लिए यह स्मृति संचित रहती है। इसके बाद इस सूचना को यहां से स्थानांतरित कर हिप्पोकैम्पस जैसे दीर्घकालिक स्मृति क्षेत्र में भेजा जाता है। यहां से इस सूचना को मस्तिष्क में स्थित कई अन्य भंडारण क्षेत्रों में पहुंचा दिया जाता है जहां इन्हे सुरक्षित रूप से सहेजा जाता है।

इस विषय पर शोध करने वाले शोधकर्ता कैलटेक (Lois Caltech) ने बताया था कि मजबूत और स्थिर यादों को न्यूरॉन्स की टीम ‘सिंक्रोनाइजेशन’ में सिंक करके रखती है। इस वजह से यादें लंबे समय तक पूरी तरह से सुरक्षित रहती हैं। वहीं शोधकर्ता कैलटेक (Lois Caltech) ने यह भी बताया कि किस तरह उम्र बढ़ने पर याददाश्त कमजोर पढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है तो उसके सिनैप्स (अनुकंपी तंत्रिकातंत्र) लड़खड़ाने लगते हैं और कमजोर पड़ने लगते हैं। यह वही हैं जो हमारी यादों को पुनः प्राप्त करने में मदद करते हैं। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती हैं तो हमारा दिमाग सिकुड़ने लगता है। इस वजह से हमारे मस्तिष्क की दीर्घकालिक मेमोरी हर दशक में अपने 5% न्यूरॉन्स खो देती है।

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