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कैंसर के मरीज़ों के लिए खुशखबरी, अब 48 घंटे में कैंसर ख़त्म

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कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के हाथ-पैर फूल जाते हैं। कैंसर को एक बेहद ही घातक और ला-इलाज बीमारी माना जाता है। कैंसर के बारे में लोगों की आम धारणा यही है कि इसका इलाज संभव नहीं है। यह धारणा काफी हद तक सही भी है। हालांकि कैंसर का पर्याप्त इलाज है। लेकिन कैंसर का इलाज ( Cancer Treatment) बेहद महंगा होने के साथ ही काफी तकलीफदेह भी है। जो लोग कैंसर के इलाज के लिए धन की व्यवस्था कर भी लेते हैं तो वे इसकी तकलीफ को नहीं झेल पाते। और कई अपर्याप्त धन की वजह से इलाज नहीं करा पाते। दोनों ही स्थिति में कैंसर जानलेवा साबित होता है।

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महंगी कीमोथेरेपी

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यह तो सभी जानते हैं कि कैंसर के इलाज के लिए कीमोथैरेपी दी जाती है। यह कीमोथैरेपी बेहद ही ज्यादा तकलीफ देने वाली होती है। इसकी तकलीफ को झेल पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। कैंसर से पीड़ित कई लोग तो इसके नाम से ही घबरा जाते हैं। हालांकि कई बार कीमोथैरेपी भी कैंसर को ख़त्म करने में नाकाम रहती है। और कई बार कैंसर पीड़ित की दर्दनाक मौत का सबब भी बन जाती है। ऐसे में कैंसर का इलाज आखिर कैसे संभव है? लेकिन अब कैंसर पीड़ितों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। कैंसर का इलाज संभव है। सिर्फ संभव ही नहीं बल्कि बेहद आसान और सुरक्षित भी है। इस इलाज से न तो कोई तकलीफ होती है न ही खर्चा बढ़ता है। बल्कि इस इलाज से तो पीड़ित को मजा भी आएगा और स्वाद भी।

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कैंसर की अचूक दवा

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आप सोच रहे हैं क्या मजाक है। इलाज से भी भला कभी किसी को मजा आता है? और इलाज में स्वाद का क्या लेना-देना? लेकिन यह बिल्कुल सच है। क्योंकि कैंसर का इलाज मीठा और बेहद ही स्वादिष्ट है। और इसके नतीजे भी महज़ 48 घंटों के भीतर सामने आने लगते हैं। कैंसर का यह इलाज प्राकृतिक इलाज है। चलिए अब आपकी उत्सुकता को ख़त्म करते हुए बता देते हैं कि कैंसर की अचूक दवा है अंगूर। जी हां रसीला और मीठा अंगूर। वैसे तो अंगूर हम सभी को बेहद पसंद होते हैं। लेकिन अंगूर कैंसर की अचूक दवा है। यह बात एक शोध में सामने आई है। कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में कैंसर के कई मरीजों पर शोध किया गया। इस शोध के नतीजों ने डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया। जिस कैंसर की दवा खोजने में डॉक्टरों को इतनी मेहनत करनी पड़ी, इतना समय बर्बाद करना पड़ा, उसका निदान तो अंगूर में छिपा है।

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48 घंटे में कैंसर पर असर

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शोध में इस बात का पता चला कि यदि कैंसर पीड़ितों को अंगूर के बीज के रस का सेवन कराया जाए, तो महज़ 48 घंटे में ही इसके चौकाने वाले परिणाम सामने आते हैं। बेहद ही तेजी से यह असर दिखाना शुरू कर देता है। शोध करने वाले फिजिक्स एवं साइकोलॉजी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. हर्डिन बी जॉन्स के अनुसार, “करीब 25 वर्षों तक चले इस शोध में सामने आया कि,अंगूर के बीज से निकलने वाला रस इस बीमारी पर बहुत तेज़ी से काम कर रहा था।” जॉन्स ने आगे यह भी कहा, “करीब 48 घंटों के भीतर ही हमारे सामने नतीजे आने शुरु हो गए थे।” उन्होंने जानकारी दी कि अंगूर के बीज में जेएनके प्रोटीन पाया जाता है। यह जेएनके प्रोटीन कैंसर कोशिकाओं को करीब 76 प्रतिशत तक जड़ से ख़त्म करने में बेहद कारगर है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि अंगूर के सेवन से सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से निजात पाया जा सकता है।

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