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इसलिए लोगों को मरने-मारने के लिए बाध्य हो जाते हैं आतंकी

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हमारे देश में अक्सर आतंकी हमलों की घटनाएं सामने आती रहती हैं | जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, नॉर्थ ईस्ट आदि कई क्षेत्रों में आतंकवादी दहशत फैलाते रहते हैं | आपने कभी सोचा है कि आखिर ये आतंकी ऐसा क्यों करते हैं | आखिर इनकी सोच, इनका मनोविज्ञान क्या होता है | ये शांतिपूर्वक भी जीवन बसर कर सकते हैं, इन्हें आतंक फैलाने से क्या हासिल हो जाता है| इस बारे में आज हम आपको बताएंगे|

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दरअसल, लोगों को मरने-मारने के लिए आतंकी बाधित क्यों हो जाते हैं, इसे जानने के लिए वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। शोधकर्ताओं की एक टीम ने स्पेन से आतंकी समूह अलकायदा और लश्कर-ए-तैयबा के समर्थकों का चयन किया और उनके दिमाग का विश्लेषण किया। रिसर्च आर्टिस इंटरनेशनल ने की है। यह एक अमेरिकी संगठन है, जो लोगों के ऐसे व्यवहार पर रिसर्च करता है, जो लड़ाई या टकराव का कारण बनते हैं या ऐसा करने के लिए बाध्य करते हैं।

पिछले कुछ सालों में हुए शोध में सामने आया कि लोगों की घृणात्मक मान्यताएं उन्हें मरने और लोगों को मारने के लिए बाध्य करती है। लेकिन लोगों में आए ऐसे दबाव को कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, समाज से मिले ऐसे दबाव को समझना थोड़ा कठिन है, जिसके कारण कोई लोगों को गलत रास्ते पर ले जाती है। इसे समझने के लिए यह रिसर्च की गई है।

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रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में प्रकाशित शोध के अनुसार, मान्यताओं से जुड़ी यह ऐसी प्रक्रिया है जो दिमाग में चलती है और लोगों में किसी काम को करने के लिए उन्हें प्रतिबद्ध करती है। चरमपंथी ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनका दिमाग इस तरह की बातों से जल्द ही जुड़ जाता है।

आतंकी समूहों के समर्थकों से उनकी मान्यताओं के बारे में बात करने पर दिमाग के कौन से हिस्से में क्या बदलाव आता है शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की। शोधकर्ता एट्रान के मुताबिक, इंसान अपने व्यवहार और सोचने की क्षमता कब खोने लगता है, न्यूरो-इमेजिंग अध्ययन से इसका विश्लेषण किया। नतीजे में सामने आया कि ऐसा होने का कारण उनकी मान्यताएं और ऐसी सोच है जिसके लिए वे खुद का जीवन दांव पर लगाने को तैयार हो जाते हैं।

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समर्थकों के दिमाग के विश्लेषण के लिए फंक्शनल एमआरआई की गई। शोध के दौरान पाया गया कि जब ऐसे समर्थकों से उनकी मान्यताओं के बारे में बात की गई तो दिमाग के खास हिस्से में कम सक्रियता देखने को मिली। यह हिस्सा इंसान के सोचने-समझने और तर्क-वितर्क करने के लिए जाना जाता है। दिमाग का यह हिस्सा चीजों को कैल्कुलेट करता और उसके परिणाम जानने में मदद करता है।

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