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तेजी से बढ़ते कैंसर की रोकथाम के कुछ उपाय

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जैसा कि सभी जानते हैं कि कैंसर एक लाइलाज बीमारी है। वहीं देश में कैंसर बेहद ही तेज गति से अपने पैर पसारते जा रहा है। पिछले 26 वर्षों में देश भर में कैंसर के मामले बेहद बढ़ गए हैं। कैंसर के इन मामलों में स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुंह और फेफड़े के कैंसर ज्यादातर सामने आ रहे हैं। देश में कैंसर कुल बीमारी का 41 प्रतिशत हिस्सा है। लोगों को इसकी रोकथाम के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। आंकड़ों पर नज़र दौड़ाई जाए तो साल 2018 से लेकर आने वाले 2040 तक के बीच प्रथम कीमोथेरेपी की जरूरत वाले मरीजों की संख्या 1.5 करोड़ पर पहुंच जाएगी। फ़िलहाल यह संख्या 98 लाख है।

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एक अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार निम्न व माध्यम आय वाले सभी देशों में आगामी 2040 तक कीमोथेरेपी वाले मरीजों की संख्या में 63 से लेकर 67 प्रतिशत तक की वृद्धि हो जाएगी। इस मामले में हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (Heart Care Foundation of India) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.के.के. अग्रवाल ने कहा कि “हमारे देश में कैंसर की व्यापकता एक समान नहीं है। कैंसर के प्रकारों में अंतर है, जो लोगों को ग्रामीण और शहरी सेटिंग्स के आधार पर प्रभावित करता है।” कैंसर के अंतर के बारे में बताते हुए डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, “ग्रामीण महिलाओं में, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर सबसे व्यापक है, जबकि शहरी महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे उग्र है।”

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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों को माउथ कैविटी रहती है जिसके कारण उन्हें मुंह का कैंसर हो जाता है। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि जबकि शहरों के पुरुषों में फेफड़े का कैंसर प्रमुख रूप से सामने आता है। देश भर में कैंसर बेहद ही तेजी से फ़ैल रहा है और इसने एक महामारी का रूप धारण कर लिया है। वहीं कैंसर की दवाएं अत्यधिक महंगी होती हैं जिस वजह से यह आम आदमी की पहुंच से बाहर रहती हैं। इसी वजह से ज्यादातर लोगों को इन दवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए मूल्य नियंत्रण बेहद जरूरी है।

कुछ सावधानियां रख कर और कुछ चीज़ों से दूरी बनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा भी जा सकता है। सबसे जरूरी चीज़ है कि तंबाकू के सेवन से बचना इस बीमारी की रोकथाम में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। वहीं पानी को उपयोग में लाने से पहले उसे अच्छी तरह से छान लेना बेहद जरूरी है। क्योंकि पानी में कई ऐसे पदार्थ होते हैं जो हार्मोन-विघटनकारी रसायनों से युक्त होते हैं। पानी को छान कर इन्हे काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं पानी के ज्यादा सेवन करने से भी इस बीमारी से बचा जा सकता है।

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