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हमारे लिए जानलेवा है हमारा स्मार्टफोन

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आज के आधुनिकता के दौर में सभी लोगों के हाथ में स्मार्टफोन होता है। अगर इसे स्मार्टफोन युग कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा। स्मार्टफोन के बिना आज के दौर की शायद कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज के दौर में मनुष्य के लगभग सारे काम ही स्मार्टफोन की मदद से होते हैं। तकनीक और विज्ञान ने जहां एक तरफ इंसान के जीवन को बेहद ही सुगम बना दिया है वहीं इसके कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं। हालांकि अभी तक लोग स्मार्टफोन के दुष्प्रभावों से अनजान हैं लेकिन इसके ज्यादा इस्तेमाल से इंसान को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि स्मार्टफोन से रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा उत्सर्जित होती है। यह ऊर्जा गैर-आयनकारी विद्युत चुम्बकीय विकिरण का ही दूसरा रूप है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा को ऊतकों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। हालांकि यह कई कारणों पर निर्भर करता है। जिसमें सेलफोन की तकनीक, और इंसान व सेल फोन की दूरी आदि बातें निर्भर करती हैं। हालांकि वैज्ञानिक शुरुआत से ही स्मार्टफोन इस्तेमाल के खतरों के बारे में बताते आ रहे हैं लेकिन फिर भी लोग इसे नज़रअंदाज़ करते आ रहे हैं।

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साल 2011 में मोबाइल फोन विकिरणों को अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने कैंसर रोग का कारक माना था। मतलब कि स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रयोग से कैंसर जैसे कई घातक रोग हो सकते हैं। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताया था कि, स्मार्टफोन के इस्तेमाल से मनुष्यों के नींद के पैटर्न में परिवर्तन होता है, सिरदर्द, कम शुक्राणुओं की गिनती, सुनने में समस्या और उनके व्यवहार में परिवर्तन जैसी कई समस्याएं सामने आती हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि स्मार्टफोन इंसान की जरूरत बन चुका हैं लेकिन फिर भी कई तरह की सावधानी रख कर इससे होने वाले खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि स्मार्टफोन से जितना हो सके दूरी बना कर रखें। इसे शरीर से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कभी भी स्मार्टफोन को ऊपर की जेब में नहीं रखना चाहिए। स्मार्टफोन पर बात करने के लिए हैडफोन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा बेहतर होता है। साथ ही उन्होंने बताया था कि कभी भी स्मार्टफोन को तकिए के नीचे रखकर नहीं सोना चाहिए।

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