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हमेशा हेल्दी रखेगा यह नया डाइट प्लान

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स्वस्थ रहने के लिए लोग क्या नहीं करते, और अपनी-अपनी समझ के अनुसार ही अपनी डाइट तय करते हैं। हमें जो भी हेल्दी लगता है हम उसे अपनी डाइट में शामिल कर लेते हैं, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने एक डाइट प्लान शेयर किया है। इस डाइट प्लान को ‘लैंसेट डायट’ के नाम से साझा किया गया है। इस प्लान में रोजाना की डाइट के बारे में बताया गया है। आइए जानते हैं इस प्लान के बारे में।

 सेहत बनाए रखने के लिए हम सभी अपनी समझ के मुताबिक डायट पर ध्यान देते हैं. अपनी समझ और नॉलेज से हमें जो हेल्दी लगता है वही खाते हैं. लेकिन अब रिसर्चर्स ने lancet diet नाम से एक डायट प्लान शेयर किया है. लैंसेट डायट को स्वस्थ रखने वाली डेली डाइट के पाले में रखा गया है. आइए जानते हैं क्या है इस डायट की खासियत.

इस प्लान में बताया गया है कि, आपके रोजाना के खाने में से मीठे की मात्रा को आधा कर दिया जाए तो, आपकी स्वास्थ्य समस्या आधी खत्म हो जाएगी। शुगर के अलावा रेट मीट भी कम करने की सलाह इस प्लान में दी गई है। वहीं इस प्लान में फ्रूट, सब्जियां और मेवे भरपूर मात्रा में खाने की सलाह दी गई है। लैंसेट डायट हेल्दी होने के साथ-साथ एन्वायरमेंटल फ्रेंडली भी है।

इस प्लान को तैयार करने के लिए 19 वैज्ञानिकों ने शोध किए और 16 देशों के 18 लेखकों ने The EAT-Lancet कमिशन के तहत इस प्लान को तैयार किया है। इस प्लान को बनाने वाले 19 वैज्ञानिकों के पैनल में भारत के, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की तरफ से श्रीनाथ रेड्डी और सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की तरफ से सुनिता नारायण शामिल हुईं थी। डाइट कमीशन ने बताया कि एक वयस्क की रोजाना डाइट में 2500 कैलोरीज होनी चाहिए। इस 2500 कैलोरीज में से 800 कैलोरीज चावल, गेंहू या मक्के से, 204 कैलोरी फल सब्जियों से लेनी चाहिए।

 डायट कमिशन ने निर्देश दिया कि जिस व्यस्क की रोजाना की डायट में 2500 कैलोरीज हैं. उसकी 800 कैलोरीज का सोर्स चावल, गेंहू या मक्का होना चाहिए. 204 कैलोरी फल सब्जियों से लें. रेड मीट से 30 से ज्यादा कैलोरी नहीं लें.

रेड मीट से 30 से ज्यादा कैलोरी नहीं लेना चाहिए। कमीशन ने यह भी निर्देश दिया कि शुगर और फैट को आइडियल डाइट में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

इस डाइट प्लान को अपनाकर आप हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं। शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दुनिया में, अनहेल्दी डाइट के कारण ही लोग बीमार पड़ते हैं। रियपोर्ट में यह भी बताया गया कि, खराब सेहत की वजह से सालाना 11 मिलियन (1 करोड़ 10 लाख) प्री-मिच्योर बेबी की डेथ हो जाती है।  (प्रभात)

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