World No Tobacco Day 2019 : Cigarette के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप !

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Cigarette का सेवन सेहत के लिए सही नहीं है यह बात हर कोई जानता है | इस सच्चाई को जानते हुए भी लाखों लोग धूम्रपान करते है | भारत में तंबाकू का सेवन (World No Tobacco Day 2019) करने वाले करोड़ों लोगों में ज्यादातर इसके घातक परिणामों से वाकिफ है| धूम्रपान न करने वालों को भी इससे खतरा रहता है| धुएं के संपर्क में आकर हर साल जान गंवाने वाले लाखों पैसिव स्मोकर्स के अलावा लोग थर्ड हैंड स्मोकिंग के खतरे में हो सकते हैं क्योंकि सिगरेट पीने के घंटों बाद भी वातावरण में सिगरेट के अवशेष रह जाते हैं जिसमें 250 से ज्यादा जानलेवा रसायन होते हैं|

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सिगरेट के अवशेष, राख, बड में भी खतरनाक केमिकल आमतौर पर सिगरेट पीने वाले और धुएं के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों को धूम्रपान के दुष्प्रभाव का सामना करने वालों की श्रेणी में रखा जाता है| सिगरेट से खतरे का नया रूप ‘थर्ड हैंड स्मोकर्स’ ही है| थर्ड हैंड स्मोकिंग सिगरेट के अवशेष हैं, जैसे बची हुई राख, सिगरेट बड और जिस जगह तंबाकू सेवन किया गया है, वहां के वातावरण में उपस्थित धुंए के रसायन| इसका सबसे बड़ा असर बंद कार, घर, ऑफिस का कमरा और वहां मौजूद फर्नीचर और वातावरण पर होता है|

धूम्रपान से फेफड़े का कैंसर, ब्रॉन्काइटिस और हृदय रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है| श्री बालाजी ऐक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट में सीनियर कंसलटेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, डॉ ज्ञानदीप मंगल बताते हैं कि एक अनुमान के अनुसार 90 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर, 30 प्रतिशत अन्य प्रकार के कैंसर, 80 प्रतिशत ब्रॉन्काइटिस, इन्फिसिमा और 20 से 25 प्रतिशत घातक हृदय रोगों का कारण धूम्रपान है| भारत में जितनी तेज़ी से धूम्रपान के रूप में तंबाकू का सेवन किया जा रहा है उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हर साल तंबाकू सेवन के कारण कितनी जानें खतरे में हैं| तंबाकू पीने का जितना नुकसान है उससे कहीं ज़्यादा नुकसान इसे चबाने से होता है| तंबाकू में कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसे जहरीले पदार्थ पाये जाते हैं और यह सभी पदार्थ जानलेवा हैं|

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इस बारें में जेपी हास्पिटल, नोएडा में असिस्टेंट डायरेक्टर सर्जिकल आंकोलॉजी डा. आशीष गोयल का कहना है कि तंबाकू का असर केवल लंग कैंसर तक ही सीमित नहीं है| यह मुंह के कैंसर, खाने की नलीका प्रभावित होना और फेफड़ों के संक्रमण का कारण भी हो सकता है| इसके अलावा एक डराने वाला तथ्य यह भी है कि तंबाकू छोड़ देने के बाद भी कैंसर की आशंका बनी रहती है| इसलिए यह जरूरी है कि इसके दुष्प्रभावों से बचने या उन्हें कम करने के उपाय करने की बजाय सिगरेट और तंबाकू के इस्तेमाल की बुरी लत को छोड़ने के उपाय किए जाएं|

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WHO के आंकड़ों के अनुसार
– दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों में से 12 प्रतिशत भारत के है |
– भारत में हर साल 1 करोड़ लोग तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से मारे जाते है|
– 13 से 15 वर्ष के आयुवर्ग के 14.6 प्रतिशत लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं|
– 30.2 प्रतिशत लोग इंडोर कार्यस्थल पर पैसिव स्मोकिंग के प्रभाव में आते हैं|
– 7.4 प्रतिशत रेस्तरां में और 13 प्रतिशत लोग सार्वजनिक परिवहन के साधनों में धुएं के सीधे संपर्क में आते हैं|
– 36.6 प्रतिशत लोग सार्वजनिक स्थानों पर और 21.9 प्रतिशत लोग घरों में पैसिव स्मोकिंग के दायरे में आते हैं।

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