ब्रांडेड जूते कर रहे हैं आपके पैरों को कमजोर, देखें वीडियो

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आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत अवेयर हो चुके हैं। सिर से लेकर पैर तक अपने शरीर (Branded Shoes) का पूरा ख्याल रखते हैं। इसलिए वह घंटों जिम में समय बिताते हैं, रनिंग (running) करते हैं, वॉकिंग (walking) करते हैं।  साथ ही ये सब करते हुए लोग अपनी एक्टिविटी के हिसाब से अपने कपड़ों का चयन करते हैं। जैसे अगर ऑफिस (office) जाना है तो फॉर्मल कपड़े और अगर जिम या एक्सरसाइज करना है तो स्ट्रैचुअल कपड़े या लोवर टीशर्ट या ट्रैक सूट पहनते हैं, लेकिन लोग जूते हर जगह पहनते हैं। बस फर्क यह होता है कि ये या तो चमड़े के होते हैं या स्पोर्ट्स शूज।

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जूतों (Branded Shoes)  में भी कई तरह की वैरायटियां होती हैं। जब से हमने अपनी लाइफ स्टाइल को आधुनिक बनाया है तब से लेकर आज तक कई ब्रांड्स के जूतों को हमने देखा और पहना है। अब लोग ब्रांड्स का नाम भी जाने लगे हैं और समझने भी लगे हैं कि किस जूते से उन्हें कितना फायदा है। लोग हज़ारों और लाखों रुपए तक के जूते भी पहन रहे हैं। हालांकि काम सभी का एक ही है। जूते आदमी अपने पैरों की सुरक्षा के लिए पहनता है जिससे उसके पैरों को चोंट न लगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि जाने- अनजाने में ये जूते आपकी सुरक्षा नहीं करते बल्कि आपको नुकसान पहुंचा रहे हैं। आपको बता दें कि एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है। इटली की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ बोलोग्ना’ के शोधकर्ताओं की टीम ने आधुनिक इंसान की हड्डियों की तुलना पाषाण काल के इंसानों की हड्डियों से की। उन्होंने पाया कि 21वीं सदी के मनुष्यों की एड़ियों के जोड़ की हड्डियां पूर्वजों की तुलना में कम लचीली और मोटी थीं। इसकी वजह से इनके टूटने या फ्रैक्चर होने का खतरा भी ज्यादा था।

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वैज्ञानिकों ने एड़ियों के जोड़ में हुए बदलावों के लिए आधुनिक जूतों (Branded Shoes) और कसरत की कमी को जिम्मेदार ठहराया। शोधकर्ताओं ने कहा, एड़ियों की हड्डियों का आकार कसरत और जूतों पर निर्भर करता है और यह पूरे जीवनकाल में बदलता रहता है। प्राचीन समय में इंसान के पूर्वज खाली पैर ही चला करते थे या फिर बहुत कम ही पैरों में पहनने वाली किसी चीज का इस्तेमाल करते थे। वे उबड़-खाबड़ सतहों पर लंबी दूरी पैदल तय करते थे। आजकल लोग ज्यादातर जूते पहने रहते हैं। शोध में 142 पैरों की हड्डियों की थ्री डी तस्वीर बनाई गई। इनमें से कुछ प्राचीन और कुछ आधुनिक इंसानों की थी। शोधकर्ताओं ने देखा कि पाषाण काल में शिकार करने वाले इंसानों की एड़ियों की हड्डियां आधुनिक समय में शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में छोटी थीं। किये गए अध्ययन में पता चला कि कड़े और भारी जूते एड़ियों की हड्डियों को घूमने से रोकते हैं । साथ ही कसरत की कमी से भी एड़ी की हड्डियां कमजोर हो गईं।

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Mradul tripathi

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