फिज़ा में गूंजते आवाज़ के जादूगर हेमंत दा के गीत

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अपने मधुर संगीत से फ़िल्मी जगत को संवारने वाले महान गायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिज़ा में गूंजते हैं| ‘न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जाने, मगर लगता है कुछ ऐसा मेरा हमदम मिल गया…’, ‘है अपना दिल तो आवारा…न जाने किस पे आएगा’ और ‘तेरी दुनिया में जीने से…’ जैसे सदाबहार गीतों की सौगात देने वाले हेमंत दा आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके गीत आज भी लोगों की जुबां पर हैं| अपनी गायिकी से लोगों को दीवाना बनाने वाले हेमंत ने हिंदी के अलावा बांग्‍ला और मराठी में भी गाने गाए हैं|

हेमंत दा की आवाज आज भी हमें साठ के दशक के भारतीय सिनेमा जगत में वापस ले जाती है| उन्होंने न सिर्फ फिल्मी गीतों में अपनी आवाज दी बल्कि उन्होंने बतौर संगीतकार भी काम किया| उन्होंने बांग्ला और हिंदी भाषा में लगभग 2000 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए|

देशभक्ति की भावना दे ओतप्रोत

हेमंत दा के कई गीत आज भी देशभक्ति की भावना जाग्रत कर देते हैं| हर वर्ष राष्ट्रीय पर्व के दौरान उनके गीत सुने ही जाते हैं| ‘वंदे मातरम…’, ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की…’, ‘इंसाफ की डगर पे बच्चों दिखाओ चल के…’ जैसे उनके गीत सदाबहार हैं, जो बच्चे भी गुनगुनाते हैं|

उनका जन्म बनारस में 16 जून 1920 को हुआ था| उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन उन्हें इस फील्ड में रुचि नहीं थी इसलिए संगीत में अपनी किस्मत आजमाई| संगीत में हेमंत कुमार की रुचि बचपन से ही थी| उन्होंने केवल 13 वर्ष की उम्र में यानी 1933 में अपना पहला गीत अखिल भारतीय रेडियो में गाया था|

फिल्म ‘नागिन’ का गाना ‘मन डोले मेरा तन डोले’ हेमंत कुमार द्वारा कंपोज किया गया वही गाना था, जिसकी बदौलत हेमंत कुमार को एक संगीत निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई थी| उन्होंने ‘साहब बीवी और गुलाम, जागृति, मां-बेटा, नागिन, अनजान, लगान, दो दिल, दो दूनी चार, एक ही रास्ता, अनुपमा और सहारा जैसी फिल्मों में हिट संगीत दिया है| 26 सितंबर 1989 को दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया| आज भले ही वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन संगीत जगत में उनके योगदान की वजह से वे हमेशा हमारे बीच रहेंगे|

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