राजकुमार राव ने बताया, क्या है सफलता ?

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फ़िल्मी जगत की चकाचौंध से दूर एक साधारण सी पृष्ठभूमि से आए अभिनेता राजकुमार राव ने अपने अभिनय से बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाई है| राव एक ऐसे अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने अभिनय को दोबारा परिभाषित किया है और उनकी फ़िल्में इस बात का प्रमाण हैं| भारत के फिल्‍म एंड टेलीविजन इंस्‍टीट्यूट से स्‍नातक की पढ़ाई पूरी करने के दो वर्ष बाद दिवाकर बनर्जी की ‘लव सेक्‍स और धोखा ‘ (2010) से डेब्‍यू करने से लेकर अब तक इस असाधारण कलाकार ने साधारण लोगों की असाधारण परिस्थितियों में चित्रण करके नाम कमाया है।

‘गैंग्‍स ऑफ वासेपुर – पार्ट 2’, ‘तलाश’, ‘काइ पो चे’, ‘क्‍वीन’, ‘सिटी लाइट्स’, ‘अलीगढ़’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्‍यूटन’ और ‘ट्रैप्‍ड’  ने राजकुमार राव को एक अच्छे अभिनेता के रूप में स्थापित किया है| राजकुमार राव की मेहनत और लगन की इस कहानी से हम बहुत कुछ अच्छा सीख सकते हैं|

शुरुआती असफलता

बॉलीवुड में अपने शुरुआती दिनों में राजकुमार राव को कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा| वे ऑडिशन देने जाते, पर रोल किसी और को मिल जाता| उनके दृढ़ निश्चय ने उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया और वे अपने सपनों को पूरा करने में लगे रहे|

किसी भी भूमिका से उन्हें ऐतराज़ नहीं

राजकुमार राव अपनी हर फिल्म में अलग-अलग किरदार में देखे जाते हैं और वे हर किरदार को बखूबी निभाते हैं| राव ने ऐसी कई भूमिकाएं बड़ी सहजता से निभाई है, जो बड़े-बड़े कलाकार नहीं निभा पाते|

गंभीरता से काम

राजकुमार राव अपने हर किरदार को गंभीरता से निभाते हैं और खुद को अपने किरदारों के अनुसार ढाल लेते हैं| राव अपने किरदार में जाने के लिए अपने निजी जीवन में भी उसी अनुसार परिवर्तन लाते हैं|

प्रभावशाली व्यक्तित्व

राजकुमार राव के लिए अभिनय एक जुनून है और वे अपने अभिनय को स्टारडम की चकाचौंध से नहीं नापते| वे मानते हैं कि दर्शक ही सबसे बड़ा अवॉर्ड हैं| राव एक सहज और साफ़ व्यक्तित्व के अभिनेता हैं| राव दिखावारहित हो सकते हैं, लेकिन वे बातों और विचारों के धनी हैं|

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