लता मंगेशकर की ये दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप

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संगीत की महारानी और सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर आज यानी 28 सितंबर को अपना 89वां जन्मदिन मना रही हैं| लताजी के चाहने वाले देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं| अपनी दिलकश आवाज़ से लता मंगेशकर ने अपने लाखों-करोड़ों फैंस बनाए हैं| इस खास मौके पर उन्हें बॉलीवुड सितारों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी बधाई दी| भारतरत्न का खिताब अपने नाम कर चुकीं लता मंगेशकर करीब 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गानों को अपनी आवाज़ से सजा चुकी हैं| लता मंगेशकर ने करीब 7 दशकों तक हिन्दी गानों की दुनिया पर राज किया|

लता मंगेशकर के जन्मदिन के मौके आज हम आपको उनसे जुड़ी कुछ ऐसी बात बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आपको पता हो|

लता मंगेशकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ, लेकिन उनकी परवरिश महाराष्ट्र में हुई| जब वे 7 वर्ष की थीं, तब महाराष्ट्र आईं| उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे| लता ने पांच वर्ष की उम्र से अपने पिता के साथ एक रंगमंच कलाकार के रूप में अभिनय करना शुरू कर दिया था| उन्होंने अपने गायन की शुरुआत वर्ष 1942 से की थी| उन्होंने अपना पहला गाना मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए वर्ष 1942  में गाया था| इसके बाद उन्हें फिल्म महल के गाने ‘आएगा आने वाला’ से बड़ी सफलता मिली| उनकी एक ख़ास बात यह भी है कि वे जब भी गायन करती हैं तो नंगे पैर ही करती हैं|

जब पिता ने बदल दिया नाम

लगा मंगेशकर के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है, जो बहुत ही कम लोगों को पता है| जब लताजी का जन्म हुआ था, तब उनका नाम लता नहीं बल्कि हेमा रखा गया था| एक बार उन्होंने अपने पिता के प्ले में लतिका नामक किरदार निभाया था| इस किरदार को निभाने के बाद उनके पिता ने उनका नाम लता रख दिया|

कभी नहीं गईं स्कूल – लता मंगेशकर

लता मंगेशकर ने कभी स्कूली पढ़ाई नहीं की| एक बार जब वे स्कूल में बच्चों को संगीत सिखाने लगीं तो इसके लिए उन्हें टीचर्स ने डांट दिया| इसके बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया| इसके बावजूद उन्हें 6 अलग-अलग विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि दी जा चुकी है|

मिल चुके हैं इतने सारे पुरस्कार

1958, 1962, 1965, 1969, 1993 और  1994 में फिल्म फेयर पुरस्कार मिला|

1972, 1975 और 1990 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया|

1966 और 1967 में महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार से सम्मानित

1969 में पद्म भूषण से सम्मानित

1974  में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड

1989  में  दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित

1993 में  फिल्म फेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1996 में  स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1997  में  राजीव गांधी पुरस्कार से नवाजा गया

1999  में  एन.टी.आर. पुरस्कार दिया गया

1999  में  पद्म विभूषण से सम्मानित

1999  में ज़ी सिने का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया

2000  में आईआईएएफ का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया

2001  में स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2001  में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाज़ा गया

2001  में नूरजहां पुरस्कार दिया गया

2001  में महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित

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