विशाल ददलानी और नेहा कक्कड़ बने केशवलाल के मुरीद

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‘इंडियन आइडल सीजन 10’ में देश के कई प्रतिभाशाली गायकों की आवाज़ सुनने को मिल रही है| टेलीविजन रियलिटी शो में कई गायकों ने शो के जज विशाल ददलानी और नेहा कक्कड़ को अपनी आवाज का मुरीद बनाया| इस शो की मदद से देश का नया सितारा खोजा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हम पुराने कलाकारों को भूलते जा रहे हैं| कुछ पुराने कलाकारों के साथ तो नौबत यहां तक आ पड़ी है कि उन्हें भीख मांगकर गुज़ारा करना पड़ रहा है| इन्हीं भूले-बिसरे कलाकारों में से एक हैं केशवलाल, जो आजकल हारमोनियम बजाकर अपना गुजारा कर रहे हैं|

पिछले 30 वर्षों से केशवलाल पुणे में फुटपाथ पर हार्मोनियम बजाकर भीख मांग रहे हैं| सबसे पहले गायक मिका सिंह की नजर केशवलाल पर पड़ी और उन्होंने उनके इस हालात की जानकारी ट्विटर पर साझा की| इसके बाद उन्हें ‘इंडियन आइडल सीजन 10’ में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए लाया गया| उनके आर्थिक हालात देखकर जज विशाल ददलानी और नेहा कक्कड़ भावुक हो गए और उनकी मदद के लिए 1-1 लाख रुपए दिए|

इस रियलिटी शो में केशवलाल अपनी पत्नी के साथ आए थे| केशव ने बताया कि संगीत ही उनकी जिंदगी में सबसे ज्यादा मायने रखता है| केशव ने बताया कि उन्होंने फिल्ममेकर वी.शांताराम और म्यूज़िक कम्पोज़र कल्याणजी- आनंदजी के साथ काम किया है|

केशव ने राजकपूर स्टारर फिल्म ‘आवारा’ के लोकप्रिय गाने ‘आवारा हूं…’ की धुन बजाई| परफॉर्मेंस के बाद
विशाल ददलानी ने कहा, “यह हमारी खुशकिस्मती है कि केशवलाल शो में आए|  उन्हें देखकर बहुत अच्छा महसूस हुआ, वे एक ऐसे इंसान हैं, जो अपने संगीत के प्रति बेहद विश्वासी हैं, वह हमारे लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं|”

विशाल ने आगे कहा, “केशव ने हमें सिखाया है कि कुछ भी हो, कभी किसी को अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए| मैं अपने दोस्तों और इंडस्ट्री के लोगों को उनकी मदद करने के लिए आगे आने को कहूंगा|”

केशवलाल की कहानी

इस शो के दौरान केशवलाल ने सफलता की चोटी पर पहुंचने से लेकर अपनी संपत्ति खो देने तक की कहानी बताई| उन्होंने बताया कि काफी साल तक वे फुटपाथ पर ही रहे| गली-गली जाकर हार्मोनियम बजाया और गाना गाया| केशवलाल ने बताया कि वे ज़रा भी नहीं चाहते थे कि फुटपाथ पर गाना गाएं, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया| बच्चे शराबी निकले, ऐसे में खुद का और बीवी का गुजारा करने के लिए हार्मोनियम लेकर फुटपाथ पर आ गए|

10 वर्ष की उम्र से ही केशवलाल अपने पिताजी मूलचंद के साथ हार्मोनियम बजाते थे| उनके पिताजी श्रीलंका के कोलंबो में जवानों का मनोरंजन करते थे| कुछ साल के बाद वे परिवार के साथ इंडिया आइ| केशवलाल मुंबई में हार्मोनियम लेकर फुटपाथ और जूहू बीच पर लोगों को गाना सुनाया करते थे| एक दिन वे एक फ़िल्म स्टूडियो के बाहर हार्मोनियम बजा रहे थे, तब मशहूर फ़िल्म निर्माता व्ही.शांताराम की उन पर नज़र पड़ी और उन्हें अपने पास बुला लिया| उन्हें ‘नागिन’ फ़िल्म में हार्मोनियम बजाने का मौका मिला| इस फिल्म के संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी थे| इसके बाद उन्हें काफी काम मिलने लगा|

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