चार्ली चैपलिन : एक जीवन मुस्कुराहटों के नाम

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हर दर्द को जो हंसी में बदल दे, ऐसे थे चार्ली चैपलिन और उनकी अदाकारी| हॉलीवुड एक्टर, फिल्ममेकर और हंसी के बेताज बादशाह चार्ली चैपलिन का आज 16 अप्रैल को जन्मदिन है| इस महान कलाकार ने बिन कुछ बोले ही रोते हुओं को भी हंसाया| शायद ही ऐसा कोई होगा, जिसके चेहरे पर चार्ली चैपलिन की अदाकारी देखकर हंसी न आए| 

चार्ली का जन्म 16 अप्रैल 1889 को लंदन में हुआ था| उनका पूरा नाम चार्ल स्पेंसर चैपलिन था। उनका परिवार बेहद गरीब था और 9 साल की उम्र से उन्हें अपना पेट पालने के लिए काम करना पड़ा। चार्ली के माता-पिता उनके बचपन में ही अलग हो गए थे। बचपन में ही उनकी मां ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया था। इसके बाद 13 साल की उम्र में चार्ली की पढ़ाई भी छूट गई।

बेहद कम उम्र में ही चार्ली ने अभिनय और बतौर कॉमेडियन काम करना शुरू कर दिया था| महज 19 वर्ष की उम्र में वे अभिनय करने अमरीका चले गए| अमरीका से चार्ली ने फिल्मों की शुरुआत की और 1918 तक आते-आते वे दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा बन चुके थे| 1914 में आई ‘मेकिंग आ लिविंग’ चार्ली की पहली फिल्म थी| चार्ली ने दोनों विश्वयुद्ध देखे और जब दुनिया युद्ध में रो रही थी, तब चार्ली लोगों को हंसा रहे थे| चार्ली ने ‘अ वुमन ऑफ पेरिस’, ‘द गोल्ड रश’, ‘द सर्कस’, ‘सिटी लाइट्स’, ‘मॉर्डन टाइम्स’ जैसी बेहद मशहूर और सफल फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों को आज भी बहुत पसंद किया जाता है।

अपनी निजी और प्रोफेशनल लाइफ में चार्ली का विवादों से भी काफी नाता रहा| साल 1940 में आई उनकी फिल्म ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ काफी विवादों में रही थी| इस फिल्म में चार्ली ने एडोल्फ हिटलर का किरदार निभाया था| बाद में अमरीका में उन पर कम्युनिस्ट होने के आरोप भी लगाए गए और उन पर एफबीआई की जांच बिठा दी गई| इसके बाद चार्ली ने अमरीका छोड़ दिया और स्विट्जरलैंड में जाकर बस गए|

मशहूर साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन और ब्रिटेन की महारानी जैसे लोग चार्ली चैपलिन के प्रशंसक थे| हालांकि खुद चार्ली भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका से काफी प्रभावित थे| वे महात्मा गांधी का बहुत सम्मान करते थे| भारत के मशहूर बॉलीवुड कलाकार भी चार्ली के फैन थे। राजकपूर ने अपनी कई फिल्मों में चार्ली को कॉपी किया था|

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