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बेमिसाल राजकुमार के गहरे राज़

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ऐसे अभिनेता जिन्होंने निर्देशक को कहा  तुम्हारे पास से बिजनौरी तेल की बदबू आ रही है, हम फिल्म तो दूर तुम्हारे साथ एक मिनट और खड़ा होना बर्दाश्त नहीं कर सकते|

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जानी.. हम तुम्हे मारेंगे, और ज़रूर मारेंगे.. लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा और वह वक़्त था एक ऐसे अभिनेता का जिनके पास न चेहरा था न पर्सनालिटी लेकिन था(Rajkumar) सिर्फ आवाज़ का रोब और ऐसे शब्द जैसे की सनकी, अक्खड़, बेबाक और मुंहफट जैसे शब्द सिर्फ उन्ही अभिनेता के लिए इस्तेमाल किये  जाते थे  अब आप सोच रहे होंगे की ऐसे एक्टर कौन थे तो हम आपको बतातें हैं| वे कोई और नहीं  बल्कि राजकुमार(Rajkumar)थे |

राजकुमार का जन्म पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 8 अक्तूबर 1926 को हुआ था और हां राजकुमार एक्टर नहीं बल्कि  थाने में सबइंस्पेक्टर के रूप में काम करते थे।( FilmTiranga)  जब  राजकुमार सबइंस्पेक्टर थे उसी दौरान एक रात एक सिपाही ने राजकुमार (Rajkumar)से कहा कि हुजूर आप रंग ढंग और कद काठी से किसी हीरों की तरह दिखते हैं|  अगर आप हीरों बन जाए तो आप लाखों दिलों पर राज कर सकते हैं। फिर क्या था राजकुमार को यह बात इतनी जमी की उन्होंने पुलिस के पद से इस्तीफा दे दिया और फिल्मीं दुनिया में कदम रख दिया बहुत कम होता है जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी छोड़ दूसरी दुनिया में कदम रखता हैं |

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वर्ष 1952 मे प्रदर्शित फ़िल्म ‘रंगीली’ से की उस फिल्म में वे  छोटी सी भूमिका में थे |  यह फ़िल्म सिनेमा घरों में कब लगी और कब चली गयी। यह पता ही नहीं चला। इस बीच उनकी फ़िल्म ‘शाही बाजार’ भी प्रदर्शित हुई। जो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी।’शाही बाजार’ की असफलता के बाद राजकुमार के तमाम रिश्तेदार यह कहने लगे कि तुम्हारा चेहरा फ़िल्म के लिये सही नहीं है और कुछ लोग कहने लगे कि तुम खलनायक बन सकते हो। वर्ष 1952 से 1957 तक(Rajkumar) राजकुमार फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। ‘रंगीली’ के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली राजकुमार उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने ‘अनमोल’ ‘सहारा’, ‘अवसर’, ‘घमंड’, ‘नीलमणि’ और ‘कृष्ण सुदामा’ जैसी कई फ़िल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई|

वर्ष 1957 में फ़िल्म ‘मदर इंडिया’ से राजकुमार को सफलता मिली और फिर उनकी लगातार फ़िल्में आती रही और सिनेमाघरों पर धमाल करती रही |90  के दशक में(Rajkumar) राज कुमार ने फ़िल्मों मे काम करना काफ़ी कम कर दिया। इस दौरान राज कुमार की  एक फिल्म ‘तिरंगा’  जिसके बाद बॉक्स ऑफिस पर राजकुमार छा गए |ना तलवार की धार से, ना गोलियों की बौछार से.. बंदा डरता है तो सिर्फ परवर दिगार से| कहा जाता हैं की राजकुमार एक ऐसे अभिनेता थे जिन्हे अगर किसी फिल्म  के डॉयलॉग   पंसद नहीं आते थे तो वे कैमरे के सामने ही डॉयलाग अपने हिसाब से  बदल लेते थे, और किसी की मजाल की निर्देशक उनसे कुछ बोल पाए|

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राजकुमार के कुछ ऐसे किस्से जो सुनने लायक हैं वो हैं की ज़ीनत को देखने के बाद राजकुमार ने कहा “जानी, शक्ल-सूरत से तो माशाअल्लाह लगती हो, फिल्मों में ट्राई क्यों नहीं करती”जब बप्पी लेहरी से राजकुमार पहली बार मिले तब पता है क्या कहा “वाह, शानदार|एक से एक गहने, बस मंगलसूत्र(Bappi lehri) की कमी रह गई है.”एक और बार जो राजकुमार की मज़ेदार है 1968 में फिल्म ‘आंखें आई थी|डायरेक्टर थे रामानंद सागर और हीरो थे धर्मेंद. लेकिन किस्सा राजकुमार से जुड़ा है| डायरेक्टर राजकुमार को फिल्म में लेना चाहते थे| डायरेक्टर उनके घर पहुंचे और फिल्म की कहानी सुनाई(Rajkumar)| राजकुमार ने अपने पालतू कुत्ते को आवाज लगाई और उससे पूछने लगे कि क्या वो फिल्म में काम करेगा, कुत्ते के कुछ न कहने पर राजकुमार ने रामानंद सागर से कहा,“देखा! ये रोल तो मेरा कुत्ता भी नहीं करना चाहेगा| तो ऐसे थे राजकुमार जिसकी आवाज़ का रॉब ही काफी था पुरे सिनेमा जगत और दर्शको के लिए|

 

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