नेहा धूपिया का दावा फिल्मों में होता है महिला कलाकारों के साथ भेदभाव

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आधुनिक वक़्त के चलते भारत के कई क्षेत्रों में अब भी पुरुष वर्चस्व की स्थितियां हैं। जहां भारत का संविधान हमे समानता सिखाता है, वहीं कुछ हिस्सों में आज भी लोगों द्वारा महिलाओं (Neha Dhupia Claims To Discriminate) से भेदभाव किया जाता है जैसा पुराने जमाने में होता था। आज के समय में जहां लड़कियां हर क्षेत्र में पुरुषों से कदम से कदम मिलकर आगे बढ़ रही हैं, हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं, देश का नाम रोशन कर रही हैं और पुरुषो को कड़ी टक्कर भी दे रही हैं। वहीं बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री नेहा धूपिया ने उनके साथ हुए भेदभाव का खुलासा किया है। नेहा धूपिया बॉलीवुड  (Neha Dhupia Bollywood) की जानी-मानी और काफी मशहूर एक्ट्रेस हैं। हालांकि सिनेमा जगत में उन्होंने बॉलीवुड से नहीं बल्कि मलयालम फिल्म से डेब्यू किया था। उनका डेब्यू बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस एक मलयालम फिल्म ‘मिन्नाराम (Minnaram)’ से हुआ था। हाल ही में उनका इंटरव्यू एक न्यूज वेबसाइट ने लिया, जिसमें नेहा ने अपने साथ हुए भेदभाव का तो खुलासा किया साथ ही यह भी बताया कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों के साथ किस तरह से भेदभाव किया जाता है। अपने इंटरव्यू में नेहा ने कहा कि –

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(Neha Dhupia Claims To Discriminate) “बहुत पहले, जब मैं साउथ की फिल्मों में काम कर रही थी, तो सेट पर सब कोशिश करते थे कि पहले हीरो खाना खाए। तब मेरी हालत भूख से मरने वाली होती थी। लेकिन वो लोग मुझे नहीं खाने देते थे। वो लोग कहते, पहले वो (हीरो) प्लेट उठाएंगे। लेकिन वो अभी शॉट कर रहे हैं। ये बहुत ही अजीब सा था। हालांकि ये बहुत सालों पहले की बात है। तब ऐसा होता था। लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होता। मेरे साथ भी ऐसा सिर्फ एक बार हुआ और मुझे बहुत हंसी आई। मुझे इससे बहुत ज्यादा परेशानी नहीं हुई क्योंकि मैं बोल देती थी, ठीक है और वहीं बैठ जाती थी।”

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Neha Dhupia Claims To Discriminate Against Female Actors

सिर्फ नेहा (Neha Dhupia Claims To Discriminate) ही नहीं बल्कि साउथ की और भी कई अभिनेत्रियों ने इस विषय पर बात की है, और साउथ इंडस्ट्री में होने वाले भेदभाव पर बोला है। साल 2018 में आयोजित हुए इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave) में अदाकारा श्रुति हरिहरन (Shruti Hariharan) ने कास्टिंग काउच से जुड़ा अपना एक एक्सपीरियंस शेयर किया। उस श्रुति महज़ 18 वर्ष की थी। श्रुति ने कहा – “मैं डांसर थी। एक दिन में रोते हुए अपने कोरियोग्राफर के पास पहुंची और उन्हें एक प्रोड्यूसर की हरकत के बारे में बताया तो उन्होंने कहा- अगर तुम ये हैंडल नहीं कर सकती तो इंडस्ट्री छोड़कर चली जाओ। मेरे साथ फिर कुछ वैसा ही हुआ। मैंने कन्नड़ भाषा की एक फिल्म की थी। इसके तमिल रीमेक के लिए एक प्रोड्यूसर ने मुझे कॉल किया। फोन पर उसने मुझसे कहा हम पांच प्रोड्यूसर हैं। आपको हम पांचों के बीच में एक्सचेंज किया जाएगा। जब हम चाहेंगे आपको बुला लिया करेंगे, लेकिन एक-एक करके। तब तक मैं जवाब देना सीख चुकी थी। मैंने जवाब में कहा- मैं साथ में चप्पल लेकर आऊंगी, जिसे इस्तेमाल करने में मुझे कोई झिझक नहीं होगी। उस दिन के बाद से मुझे तमिल फिल्मों में अच्छे रोल ऑफर नहीं हुए। लेकिन उस दिन के बाद से मेरे सामने ऐसी दिक्कतें नहीं आईं।”

Neha Dhupia Claims To Discriminate Against Female Actors

हालांकि बात सिर्फ एक्ट्रेस (Neha Dhupia Claims To Discriminate) के साथ होने वाले वर्ताव या फिर उनके परफॉर्मेंस की नहीं है, कई बार कैमरे का गलत एंगल भी सीन को पूरी तरह से गलत प्रदर्शित कर देता है। इस बात की जानकारी साझा की परिणीता सुभाष ने। दरअसल परिणीता ने अपने साथ हुआ एक वाकया बयान किया जो उनकी तेलगु फिल्म ‘जरासंधा (Jarasandha)’ से जुड़ा था। परिणीता कहती हैं – “मैं एक फिल्म कर रही थी, जिसमें मुझे एक नक्सली की पत्नी का किरदार करना था। मेरा किरदार इंटेंस और नॉन ग्लैमरस था। फिल्म में मेरा एक इंट्रोडक्शन सीन था, जिसमें मैं सीढ़ियां उतर रही हूं। शूटिंग के दौरान कैमरा मेरे चेहरे पर फोकस था। लेकिन प्रीमियर पर जब मैंने फिल्म देखी तो बहुत शर्मिंदा हुई। कैमरा एंगल ऐसा था कि वो बेवॉच का रनिंग सीन लग रहा था। और मेरे साथ में पेरेंट थे। फिल्म मेकिंग के प्रोसेस में हीरोइन का मत सबसे आखिर में आता है। बात चाहें खुद हीरोइन के कैरेक्टर की हो, डिसीजन मेकिंग में एक्ट्रेस की राय मायने नहीं रखती है।”

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– Tarun Lalwani

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