website counter widget

image1

image2

image3

image4

image5

image6

image7

image8

image9

image10

image11

image12

image13

image14

image15

image16

image17

image18

फिल्म ‘मंटो’ का पहला गाना रिलीज़

0

सआदत हसन मंटो के जीवन पर फिल्म बनाने की घोषणा के समय से ही यह फिल्म विवादों में घिरी हुई है। हाल ही में फिल्म ‘मंटो’ का पहला गाना रिलीज़ हुआ है। इस गाने को रफ़्तार ने गाया है। फिल्म में ‘मंटो’ का किरदार निभा रहे कलाकार नवाजुद्दीन सिद्दीकी समाज की हकीकत कहते नज़र आ रहे हैं। उर्दू के जाने-माने कहानीकार सआदत हसन मंटो की कहानी को अब रैप से जोड़ दिया गया है। ‘मंटोइयत’ नाम का ये रैप सिंगर रफ़्तार ने गाया है और यह इस फिल्म का पहला गाना है। इस गाने के माध्यम से मंटो के विचारों को अलग ढंग से पेश किया गया है। साथ ही इसमें कुछ आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है, जिनकी वजह से साहित्य जगत में विवाद खड़ा हो सकता है। इस गाने के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को भी उठाया गया है। इस गाने में नवाजुद्दीन कहते नज़र आ रहे हैं “मैं भी एक इंसान हूं।”

फिल्म मंटो में नवाज एक जगह पर कहते हैं कि “जब हम गुलाम थे तो आजादी का ख्वाब देखते थे, अब जब आजाद हो गए तो कौन सा ख्वाब देखें।” कुछ आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल पर मंटो की भूमिका निभा रहे नवाज़ कहते है कि “क्या ये शब्द हम रोज़ बाजारों में नहीं सुनते?”

सआदत हसन मंटो उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए थे। कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था। लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे।

 

द टैलेंटेड इंडिया टॉक शो
Share.