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नारी के विभिन्न रूप

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नारी गुणों का है भण्डार

नारी से है घर-परिवार

नारी ईश्वर का चमत्कार

नारी से बच्चों में संस्कार

दो-दो घरों को रोशन करती

नारी करती दूर अन्धकार

नारी लक्ष्मी, नारी दुर्गा

नारी शक्ति का अवतार

नारी नहीं किसी पर भार

नारी से आपस में प्यार

नारी आज है आत्मनिर्भर

नारी आज की है खुद्दार

नारी मां बेटी और बहना

नारी बिन मुश्किल है रहना

नारी परिवार की जान

नारी हर घर की है शान

नारी कर रही वो हर काम

समाज ने चुने जो पुरुष के नाम

नारी सीमा पर तैनात,

नारी खेल में भी निष्णात

 नारी को कभी भी कम मत आंको

पहले अपने गिरेबां में झांको

नारी अबला ना नादान

नारी की है अपनी पहचान

नारी में ज्ञान, नारी में विद्वत्ता

नारी का राज, नारी की सत्ता

नारी नहीं किसी से कम

सबसे जूझने का है दमख़म

आज ये सभी लीजिए जान

नारी का करिए सम्मान

क्योंकि नारी है जग जननी

क्योंकि नारी है सहधर्मिणी

नारी है ममता का खजाना

नारी बिन नहीं है संसार

 

-अंकुर उपाध्याय

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