मार्केट रिसर्चर बनकर आप भी कर सकते हैं अच्छी कमाई

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वर्तमान दौर प्रतियोगिता का दौर है | हर व्यक्ति, हर कंपनी सबसे आगे रहना चाहती है| इसके लिए वे लगातार प्रयास करते रहते हैं | इसी होड़ के कारण कई नए पद भी उपजे हैं | इन नए क्षेत्रों में हाथ आजमाकर आप भी अच्छी कमाई कर सकते हैं| ऐसा ही एक पद मार्केट रिसर्चर का भी है|

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दरअसल, अब मार्केट नई स्ट्रेटेजी पर चलता है। उसे अच्छी प्लानिंग से काम को अंजाम देना होता है। यही कारण है कि बाज़ार को कस्टमर्स को समझना होता है और इसी क्रम में उन्हें ज्यादा टाइम देना होता है। इन्हीं मकसद को पूरा करने के लिए मार्केट रिसर्चर की ज़रूरत होती है। एक तरीके से वे मार्केट और कस्टमर्स के बीच की कड़ी होते हैं। उन्हें उपभोक्ताओं के ऑप्शन, टेस्ट और उनकी आवश्यकताओं पर कड़ी नजर रखनी पड़ती है। इस डेटा को कई प्रॉसेस के जरिए कंपनियां कलेक्ट करवाती हैं। इसके बाद वह फैसला करती हैं कि किस तरह के प्रॉडक्ट की लोगों के बीच डिमांड है और इसके लिए उन्हें कैसे पहल करनी होती है।

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एक मार्केट रिसर्चर की जॉब दिलचस्प होती है। वैसे तो इस क्षेत्र में जॉब हासिल करने के लिए बैचलर की डिग्री की दरकार होती है, लेकिन सही मायने में आपकी गहरी पकड़ मार्केटिंग, इकोनॉमिक्स, साइकॉलजी, सोशियोलॉजी और स्टैटिस्टिक्स में होनी चाहिए। इस फील्ड को ऑप्ट करने से पहले आप अपने कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर कर लें क्योंकि इस स्किल की आपको बड़ी मात्रा में ज़रूरत पड़ने वाली है।

जैसे-जैसे दुनिया बदल रही है, डेटा का महत्व भी बढ़ता ही जा रहा है। बाजार को समझने के लिए डेटा की जरूरत पड़ती है। कंपनी जब किसी प्रॉडक्ट को लॉन्च करती है, तो डेटा के आधार किए गए रिसर्च के आधार पर कंपनी को फैसले लेने होते हैं। ऐसे में मार्केट रिसर्चर की भूमिका अहम हो जाती है। वह रिचर्स के लिए लोगों के बीच में जाता है और उनके पसंद और नापसंद को आधार बनाते हुए यह एक डेटा तैयार करता है, जिसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि प्रॉडक्ट का भविष्य क्या हो सकता है। कंपनी इसके माध्यम से टारगेट भी सेट करती है। इस अधार पर यह तय किया जाता है कि प्रॉडक्ट में मुख्य रूप से किसे टारगेट किया जाए। लोगों को प्रॉडक्ट के लिए लुभाने के लिए किस तरह के ऑफर दिए जाएं।

आप दिलचस्प तरीके से करियर को बिल्ड करना चाहते हैं और इसमें जबरदस्त ग्रोथ चाहते हैं, तो मार्केट रिसर्चर के रूप में करियर बनाने के लिए खुद को तैयार करें। डेटा में आपका मन रमता है, तो यह आपके लिए निश्चित रूप से एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

यहां कर सकते हैं पढ़ाई 

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, जेएनयू कैंपस, नई दिल्ली।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सेल्स, नई दिल्ली।

सिंबायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया ऐंड कम्युनिकेशन, पुणे।

यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ, लखनऊ।

मार्केट रिसर्चर उपभोक्ता की पसंद, खरीदारी की आदत, बाज़ार में रिसर्च के आधार पर एक डेटा तैयार करते हैं । इससे गुजरते हुए उन्हें कई दौर से होकर गुज़रना होता है। इसके बाद वे रिपोर्ट, ग्राफिक इलस्ट्रेशन के माध्यम से अपने रिसर्च को समझाते हैं कि कंपनी का कोई फैसला उन्हें कितना फायदा पहुंचा सकता है।

काम का स्वरूप 

कंपनी की संभावित बिक्री और बाजार से संबंधित सभी तरीके मार्केट रिसर्चर के जॉब प्रोफाइल का हिस्सा होते हैं। स्टैटिस्टिक्स डेटा को आधार बनाते हुए उसे भविष्य का अनुमान लगाना होता है। उसे अपनी कंपनी को यह बताना होता है कि आने वाले दिन में मार्केट का रुख कैसा रहेगा। ये डेटा प्रश्नावली, टेलीफोन, इंटरनेट सर्वेक्षण या फिर व्यक्तिगत साक्षात्कार को आधार बनाकर तैयार किए जाते हैं। बहुत सारे रिसर्च ग्रुप डिस्कशन पर आधारित होते हैं। इस डेटा को कलेक्ट करने के बाद उन्हें उपभोक्ताओं की वरीयता को आधार प्रदान करते हुए डिजाइन तैयार करना होता है।

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इन तीन पर पकड़ है जरूरी 

रिसर्च- यह इसका आधार होता है। इसके जरिए काफी चीजें पता चल जाती हैं। यह भी पता लगता है कि कितने लोग प्रॉडक्ट को पसंद कर रहे हैं या नहीं।

लेग वर्क- लेग वर्क भी एक अहम कड़ी होती है। इसमें फील्ड में जाकर काम को अंजाम देना होता है।

डेटा में जादूगरी- एक रिसर्चर की डेटा पर पकड़ होना जरूरी है। इसके बिना वह सटीक विश्लेषण नहीं कर सकता है।

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