यूपीएससी पास किए बिना बनेंगे अधिकारी

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मोदी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी में प्रवेश के लिए अब  तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। अब संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास किए बिना विद्यार्थी बड़े अधिकारी बन सकेंगे। दरअसल, मोदी सरकार ने बहुप्रतीक्षित लैटरल एंट्री की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। रविवार को इन पदों पर नियुक्ति के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के लिए विस्तार से गाइडलाइंस के साथ अधिसूचना जारी की गई। सरकार इसके लिए सर्विल रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी।

सरकार के इस फैसले के बाद अब बड़े अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा पास करना जरूरी नहीं होगा। प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले सीनियर अधिकारी भी सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। अधिसूचना के अनुसार, मंत्रालयों में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति होगी।

इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और प्रदर्शन अच्छा होने पर पांच वर्ष के लिए इनकी नियुक्ति की जा सकती है। इन पदों पर आवेदन के लिए न्यूनतम उम्र 40 साल है जबकि अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं की गई है।

योग्य उम्मीदवारों का चयन सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर होगा। कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमेटी इनका इंटरव्यू लेगी। योग्यता के अनुसार, सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल कार्य का अनुभव वाले आवेदन कर सकते हैं।

बता दें कि ब्यूरोक्रेस में लैटरल एंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी, लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया था। 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई, लेकिन पहली पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई।

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