2019 की वे घटनाएं जिन्होंने साल को अच्छा और बुरा बनाया

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अगर वक्त की बात करें तो ये कभी नहीं रुकने वाला है, हर समय चलता रहता है, और इस गुजरते समय के साथ दिन गुजरते हैं। महीने गुजरते हैं और फिर साल गुजर जाता है और हर साल ही भाँति यह साल 2019 भी गुजरने को है  जो फिर कभी दोबारा नहीं आएगा। ( review of events in India ) तो चलिए आज हम बात करते साल की उन चर्चित घटनाओं के बारे में जो खूब सुर्ख़ियों में रही 2019 में…

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1. प्रयागराज कुंभ मेला –

2019 में कुम्भ मेला उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में आयोजित हुआ । इस बार कुंभ इसलिए खास था, क्योंकि उत्तरप्रदेश में भाजपा की योगी आदित्यनाथ की सरकार थी जिसने इस आयोजन को आधुनिक और भव्य बानकर देश और दुनिया में प्रशंसा बटोरी। यह मेला जनवरी माह में आयोजित हुआ, जिसमें अमित शाह, नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेता शामिल हुए थे। इसी मेले में अयोध्या मामले के निपटारे और राम मंदिर बनाने की भूमिका तैयार हुई थी। ( review of events in India ) इस कुंभ मेले में 2013 में आयोजित कुंभ मेले की अपेक्षा दोगुनी तादाद में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। एक आंकड़े के अनुसार 2019 के कुंभ में 24 करोड़ से अधिक लोगों ने स्नान किया। और महशिवरात्रि के दिन रिकॉर्ड लगभग 1 करोड़ लोगों ने डुबकी लगाईं थी।

2. सबरीमाला मंदिर विवाद –

इस बार केरल में सबरीमाला का मंदिर पूरे वर्ष चर्चाओं में रहा। यहां 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है। 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने हर आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने का फैसला दिया था जिसके बाद यहां भयंकर विवाद प्रारंभ हुआ। सबरीमाला में हिन्दू समूहों की ओर से लगातार इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके बाद कोर्ट में 65 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। ( review of events in India ) इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया था। जिस मामले में 14 नवंबर 2019 को नया फैसला आया, उसमें कहा गया की पिछला फैसला बरकरार रहेगा। सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

3. अयोध्या मामले में फैसला –

धार्मिक भावनाओं से जुड़े देश के सबसे बड़े अयोध्या मामले पर इस वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया। वर्षों पुराने इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019, शनिवार को ऐतिहासिक फैसला दिया। 1 सदी से अधिक पुराने मामले का पटाक्षेप करते हुए अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए कोर्ट ने व्यवस्था दी कि मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने इस बहुप्रतीक्षित फैसले के मुख्य अंश पढ़कर सुनाए तथा इसमें उन्हें 45 मिनट लगे। संविधान पीठ ने 1,045 पन्नों का फैसला दिया। ( review of events in India ) संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। इसने कहा कि विवादित ढांचे में ही भगवान राम का जन्म होने के बारे में हिन्दुओं की आस्था अविवादित है। यही नहीं, सीता रसोई, राम चबूतरा और भंडारगृह की उपस्थिति इस स्थान के धार्मिक तथ्य की गवाह हैं। अत: संपूर्ण भूमि हिन्दू पक्ष को दी जाती है।
इससे पहले संविधान पीठ ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि 3 पक्षकारों (सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान) के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी।

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4. तीन तलाक पर कानून –

यह मामला सीधे तौर पर धर्म से तो नहीं जुड़ा है लेकिन इस सामाजिक कुरीति का कहीं-न-कहीं धर्म से संबंध होने के कारण यह वर्ष 2019 की चर्चित घटना है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में ही एक बार में तीन तलाक दिए जाने को असंवैधानिक करार दिया था। बाद में तीन तलाक से संबंधित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर 30 जुलाई 2019 मंगलवार को संसद की मुहर लग गई जिसके चलते अब यह कानून बन गया। बिल में एकसाथ तीन बार तलाक बोलकर तलाक दिए जाने को अपराध करार दिया गया है, जो कि गैरजमानती होगा। ( review of events in India ) इस बिल में दोषी को जेल की सजा सुनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है। इस बिल के कानून बनने के बाद करोड़ों मुस्लिम महिलाओं ने राहत की सांस ली और खुशियां मनाईं, हालांकि इसको लेकर विवाद भी बहुत हुआ था।

5. अमरनाथ और कैलाश मानसरोवर यात्रा –

इस बार अमरनाथ यात्रा पर आतंक का साया मंडराता रहा, हालांकि सुरक्षा के चलते कोई बड़ी घटना नहीं हुई। 1 जुलाई 2019 से शुरू हुई बाबा अमरनाथ की यात्रा के 29 दिनों में 3.20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने हिम शिवलिंग के दर्शन किए। इस यात्रा में लगभग 26 श्रद्धालुओं के अलावा 2 स्वयंसेवियों और 2 सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हो गई थी। हालांकि 45 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होना था लेकिन संसद द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सुगबुगाहट के चलते यात्रा को बीच में ही रोककर सभी यात्रियों और पर्यटकों से घर लौटने को कहा गया।
दूसरी ओर जून से प्रारंभ होने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा डोकलाम विवाद के चलते नाथुला दर्रे से नहीं होकर इस बार लिपुलेख दर्रे से हुई। यात्रा में इस साल 18 दलों के कुल 949 यात्री शामिल थे। ( review of events in India ) इनमें 747 पुरुष और 202 महिलाएं थीं। इनमें से पारिवारिक और अन्य कारणों से 23 यात्रियों ने यात्रा बीच में ही छोड़ दी, जबकि एक यात्री की गुंजी में हार्टअटैक से मौत हो गई। इस यात्रा में वैसे तो चीन की सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीयों के साथ अच्छा व्यवहार किया लेकिन कुछ यात्रियों द्वारा मानसरोवर के पास यज्ञ करने को लेकर विवाद हो गया। सावन के आखिरी सोमवार को हिन्दू तीर्थयात्रियों ने चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत के पास मानसरोवर झील किनारे हवन और पूजन किया। इस पर अली प्रीफेक्चर के डिप्टी कमिश्नर जी. किंगमिन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कर कहा कि भारतीय तीर्थयात्री उनके क्षेत्र में आते हैं, ऐसे में उन्हें नियम और कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम भारत जाएंगे तो हम भी वहां के नियमों का पालन करेंगे।

6. करतारपुर कॉरिडोर और गुरुनानकजी का 550वां जन्मोत्सव –

12 नवंबर को गुरुनानकजी की 550वीं जयंती संपूर्ण देश और देश से बाहर धूमधाम से मनाई गई। इसी जयंती के चलते भारत और पाकिस्तान ने मिलकर भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से पाकिस्तान के पंजाब में स्थित करतारपुर साहिब तक कॉरिडोर बनाया। पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक भारत ने कॉरिडोर बनाया, उसके आगे करतारपुर तक पाकिस्तान ने कॉरिडोर बनाया है।
पीएम मोदी सरकार के प्रयासों के चलते देश में गुरुनानकजी की जयंती पर नवंबर में लगभग 1,467 से अधिक श्रद्धालुओं ने कारतारपुर गुरुद्वारे में अरदास की। ( review of events in India ) यह यात्रा दोनों ही देश में बहुत ही चर्चा का विषय रही। पाकिस्तान ने इस यात्रा की आड़ में खालिस्तान समर्थकों को उकसाया, वहीं भारत ने इस यात्रा के लिए सिख समुदाय को हर तरह की सुविधाएं देने और पाकिस्तान में दोनों ही गुरुद्वरा दर्शन करने को आसान बनाया।

7. धार्मिक आधार पर उत्पीड़न –

वर्ष 2019 में बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक सहित अन्य कई मुस्लिम राष्ट्रों में धार्मिक आधार पर दूसरे धर्म के लोगों के साथ उत्पीड़न किया गया। पाकिस्तान में ईसाई, अहमदिया, शिया, सिख और हिन्दू समुदाय के साथ सबसे ज्यादा उत्पीड़न हुआ। ऐसी कई खबरें आती रहीं कि ईसाई, हिन्दू और सिख लड़कियों को जबरन उठाकर ले जाया गया और उनका किसी मुस्लिम से निकाह कर दिया गया। मुस्लिम राष्ट्रों के अलावा चीन में उइगर और म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ अभियान चलाया जाना भी खासा चर्चा में रहा।
श्रीलंका में तमिल हिन्दुओं के उत्पीड़न के बाद तमिलनाडु में लाखों की संख्या में शिविर में रह रहे तमिलों की घर वापसी भी चर्चा में रही। दूसरी ओर श्रीलंका के कोलंबो में अप्रैल माह में ईस्टर पर मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा 3 चर्च पर किए गए सिलसिलेवार बम हमले में 11 भारतीयों में समेत 258 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 500 अन्य जख्मी हो गए थे। इसके बाद वहां मुस्लिमों के खिलाफ बौद्ध अनुयायियों ने जमकर प्रदर्शन किए। ( review of events in India ) श्रीलंका की 2.1 करोड़ आबादी में 9 प्रतिशत मुस्लिम हैं जिन पर आतंकवादी संगठन आईएस से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। कहा यह गया कि यह हमला न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च मस्जिद पर हुए हमले का जवाब है। मार्च 2019 में मस्जिद में हुई गोलीबारी में लगभग 50 मुस्लिमों की मौत हो गई थी।

8- आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019-

इस वर्ष इंग्लैंड में 12वां आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप खेला गया था। यह इंग्लैंड में आयोजित 5वां विश्व कप था 30 मई से 14 जुलाई के बीच चले क्रिकेट टूर्नामेंट में इंग्लैंड विजयी रहा था। इसमें उसने न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार यह कप अपने नाम किया था। इस विश्वकप का फाइनल रोमांच से भरपूर रहा इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच यह मैच ड्रा रहा था उसके बाद निर्णय के लिए खेले गए सुपर ओवर में भी दोनों टीमों के बीच नतीजा ड्रा रहा था जिसके बाद बॉउंड्री की संख्या के आधार पर इंग्लैंड को विजेता घोषित किया गया था। पूरे वर्ष के दौरान गूगल सर्च में ये वर्ल्ड कप सबसे टॉप पर रहा। ( review of events in India ) 30 जून 2019 से 6 5 जुलाई के बीच लोगों ने इसको सबसे अधिक सर्च किया था।

9- लोकसभा चुनाव-

गूगल पर इस वर्ष जो सबसे अधिक सर्च करने में रहा वो था लोकसभा चुनाव। 19 मई से 25 मई के बीच यह काफी चर्चित टॉपिक रहा और लोगों ने खूब सर्च किया। आपको बता दें कि देशभर में 11 अप्रैल से 19 मई 2019 के बीच 7 चरणों में अयोजित हुए। इस चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराये गये थे। ( review of events in India )  इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने बूते पूर्ण बहुमत हासिल किया और केंद्र में नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार सरकार बनाई।

10- अनुच्छेद 370-

अनुच्छेद 370 का मुद्दा देश ही नहीं विदेशों में भी छाया रहा। 4-10 अगस्त के बीच इस विषय पर गूगल पर लोगों ने खूब सर्च किया। 5 अगस्त को सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही सरकार ने इस राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था। ( review of events in India ) इनमें से एक जम्मू कश्मीर तो दूसरा लद्दाख था, जिसकी मांग वर्षों से वहां के लोग कर रहे थे। इस फैंसले के बाद से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया था।

11-नागरिकता संसोधन कानून-

भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके द्वारा सन 1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गयी है कि 31 दिसम्बर सन 2014 के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाई धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी। इस विधेयक में भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए आवश्यक 11 वर्ष तक भारत में रहने की शर्त में भी ढील देते हुए इस अवधि को केवल 5 वर्ष तक भारत में रहने की शर्त के रूप में बदल दिया गया है। ( review of events in India ) इस कानून को लेकर देशभर में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा भारी विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

नागरिकता संसोधन कानून के आधार पर जो लोग भारत में रह सकते है –

31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत आने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धर्मों के अल्पसंख्यकों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा। नागरिकता अधिनियम, 1955 अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता है।

नागरिकता संसोधन कानून के आधार पर जो लोग भारत में नहीं रह सकते है –

जिसने वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश किया हो।
जो अपने निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक भारत में रहता है। ( review of events in India )
इस लाभ को देने के लिए विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम, 1920 के तहत भी छूट देनी होगी ।
वर्ष 1920 का अधिनियम विदेशियों को अपने साथ पासपोर्ट रखने के लिये बाध्य करता है।
1946 का अधिनियम भारत में विदेशियों के आने-जाने को नियंत्रित करता है।

Weekly Current Affairs :  साप्ताहिक करेंट अफेयर्स

-Mradul tripathi

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