पुण्यतिथि विशेष: महात्मा गाँधी के जीवन कि प्रेरणादायक कहानियाँ

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2 अक्टूबर 1869 को जन्मे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी (Father of Nation Mahatma Gandhi birthday) अपने पूरे जीवन भर सत्य और अहिंसा (Truth and Non Violence) के मार्ग पर चले और और लोगो को सत्य और अहिंसा (Truth and Non Violence) के मार्ग पर चलना सिखाया और अपने सत्य और अहिंसा (Truth and Non Violence) के बलबूते भारत को आजादी दिलाई भले ही 30 जनवरी 1948 को महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi Best Life Stories) की गोली मारकर हत्या कर दी गयी लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी (Father Of Nation Mahatma Gandhi) द्वारा दिखाए गये सत्य और अहिंसा के मार्ग आज भी लोगो के लिए अनुकरणीय है. महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) को सर्वप्रथम महत्मा रविंद्रनाथ टैगोर (Mahatma Rabindranath Tagore first) ने कहा था और राष्ट्रपिता सुभाषचंद्र बोष (Subhash Chandra Bose) ने कहा था। आज गाँधी जी (Gandhi ji)  की 72 वी पुण्यतिथि है इस अवसर पर हम आपको उनके जीवन की कुछ प्रेरणादायक कहानिया सुनाते है।

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महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi Best Life Stories) जब बचपन में अपने पढाई में बहुत ही कमजोर थे लेकिन उन्हें पुस्तके पढने का बहुत ही शौक था जब भी महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)  को कोई अच्छी पुस्तक मिलती तो उसे खूब मन लगाकर पढ़ते थे एक बार महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) को एक ऐसा पुस्तक मिला जिसमे श्रवण कुमार (Shravan Kumar) और उनके माता पिता के सेवा की कहानी थी किस प्रकार श्रवण अपने प्राणों की आहुति देकर भी अपने माता पिता की सेवा करते है जिसे पढकर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)  बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने निश्चय किया की वे भी श्रवण कुमार (Shravan Kumar) की तरह अपने माता पिता की सेवा करेगे.

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और जब उन्हें (Mahatma Gandhi Best Life Stories) अपने पड़ोस में हरिचन्द्र (Harichandra) के जीवन पर आधारित नाटक को देखने का मौका मिला हरिश्चन्द्र के नाटक को देखकर महात्मा गाँधी | Mahatma Gandhi के आखो में आशु आ गये और उन्होंने जीवन भर सत्य की राह पर चलने की कसम खायी चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी कष्ट क्यू न उठाने पड़े और महात्मा गाँधी ने आजीवन सत्य के राह पर चले.

Mahatma Gandhi Best Life Stories In Hindi | Must Readआपको बता दें की अन्य बालको की तरह महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi Best Life Stories) भी बचपन में बहुत ही डरपोक स्वाभाव के थे रात के अँधेरे में अपने घर में जाने से डरते थे और अगर उन्हें भूत प्रेत की कहानिया सुना दिया जाता था तब गांधीजी बहुत ही भयभीत हो जाते थे ऐसा सब देखकर उनके घर में काम करने वाली नौकरीं रम्भा ने समझाया की जब भी तुम्हे डर लगे राम का नाम लेना सब डर भाग जायेगा इस तरह गांधीजी (Gandhi ji) बचपन से अपने जबान पर राम का नाम रटने लगे और अपने डर को दूर किया और राम के नाम से इतना प्रेम हो गया था की अपने मरने के आखिरी क्षण में भी उनका आखिरी शब्द राम ही था

Mahatma Gandhi Best Life Stories In Hindi | Must Readएक बार गाँधीजी (Mahatma Gandhi Best Life Stories)  के स्कूल में निरिक्षण करने बड़े अधिकारी आये और फिर उकने क्लास के लडको को कुछ अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए सबने सही लिखा लेकिन Gandhiji ने एक शब्द गलत लिख दिया था उनके अध्यापक ने इशारे से उस शब्द को सही करने को कहा लेकिन महात्मा गाँधी तो मन के सच्चे थे सभी लडको के सभी शब्द सही निकले लेकिन महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)  का एक शब्द गलत लिखा हुआ था फिर बाद में जब उनके अध्यापक ने ऐसा जब करने को बताया था फिर भी नही किया तो गांधीजी (Gandhi ji) ने बोला जब मै गलत लिख ही दिया तो किसी के बताने से वो कैसे सही हो सकता है जब तक वो मुझे खुद सही न करने आये और अगर मै आपके बताने पर लिख भी देता तो मै निरीक्षक के सामने खुद को झूठा बना लेता इसलिए ऐसा करने को मेरा मन न हुआ शायद इसी तरह महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के मन में सत्य का विचार था जो लोगो के लिए प्रेरणा बन जाती है

एक बार अपने बुरे दोस्त की कुसंगति में आने पर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi Best Life Stories) बीडी की लत गयी और उस लड़के के कहने पर महात्मा गाँधी चोरी छिपे मांस भी खाने लगे क्यूकी महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के घर पर सभी शाकाहारी थे और इस तरह अपने गलत आदत के कारण उन्हें चोरी करने की भी आदत पद गयी क्यूकी इन सबके लिए पैसो की आवश्कयता पड़ती थी और फिर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) ने धीरे धीरे कर्ज भी लेना शुरू कर दिया था लेकिन अपने इस कर्ज को चुकाने के लिए अपने बड़े भाई के सोने के कड़े में एक टुकड़ा चुराकर बेच दिया और और अपना कर्जा तो चूका दिया,

लेकिन महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi Best Life Stories) का मन खुद को इस अपराध के लिए मान नही रहा था और अपने गलतियों को अपने पिता के सामने पत्र के माध्यम से बता दिया यह सब पढकर उनके पिताजी कुछ भी बोल न सके और महात्मा गाँधी द्वारा लिखा गया पत्र फाडकर फेक दिया यह सब देखकर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) फूटफूटकर रोने लगे और प्रण लिया की आज के बाद वे सारे बुरे काम छोड़ देंगे और इस प्रकार महात्मा गाँधी जो भी शपथ लेते उसपर हमेसा अडिग रहते थे

महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) जब अपनी पढाई पूरी कर लिया तो उन्हें वकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका | South Africa जाने का मौका मिला दक्षिण अफ्रीका में गोरे अंग्रेज भारतीयों को कुली कहकर पुकारते थे और भारतीयों के साथ वहा बहुत बुरा बर्ताव करते थे जिसका सामना गांधीजी (Gandhi ji) को भी करना पड़ा था जब वे एक दिन रेलगाड़ी के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठकर जा रहे थे तो उस डिब्बे में कुछ अंग्रेज प्रवेश किये और उसने शिकायत किया की इस कुली को दुसरे डिब्बे में बैठाया जाय लेकिन गांधीजी ने अपने इस डिब्बे की टिकट दिखाया तो भी उस रेल के कर्मचारी नही माने और महात्मा गाँधी के सामान को बाहर उठाकर फेक दिया और गांधीजी को धक्के मारकर बहार कर दिया गया जिसे देखकर महात्मा गाँधी का जीवन ही बदल गया और उन्होंने प्रण लिया ली अंग्रेजो के अत्याचार को और नही सहेगे और फिर यही से उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन की शुरुआत की

1916 की बात है काशी जो की अब वाराणसी के नाम से जाना जाता है उस समय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय | Banaras Hindu University (BHU) के शिलान्यास के दौरान दिल्ली से वायसराय गये थे जिनमे गांधीजी (Gandhi ji) को भी बुलाया गया और कार्यक्रम के दौरान महात्मा गाँधी की ने भारतीयों के सामने अपना पहला भाषण दिया वो भी अंग्रेजी में, जब महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) ने भाषण की शुरुआत किया तो उनका पहला शब्द था बड़े शर्म की बात है अपने ही देश में अपने लोगो के सामने मुझे हिंदी न बोलकर अंग्रेजी में बोलना पड़ रहा है ऐसा बोलना वहा मौजूद अंग्रेजो के गुस्से के आग में घी डालने के बराबर था लेकिन महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) बिना किसी से डरे अपने विचारो को स्वतंत्र रूप से बोलते रहे और उनका भाषण सबका सुनना था की बस लोगो के दिलो में अंग्रेजो के प्रति गुस्सा फूट पड़ा था जो आगे चलकर आजादी की क्रांति बन गयी.

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-Mradul tripathi

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