बाबा साहब आंबेडकर ने नहीं इस शख्स ने लिखा था सबसे पहले भारत का संविधान

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(BN Rau Wrote Indian Constitution) आज से ठीक 5 दिन बाद यानी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic day)है और इस दिन भारतीय गणतंत्र (Republic India) की उम्र 70 साल की हो जाएगी. गुजरे 70 सालों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत ने खुद सकारात्मक रूप से विकसित किया है. इस देश की विविधता में एकता ही इसको सबसे ज्यादा खूबसूरत बनाती है। हमारे देश का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है और इस  बाबा साहब आंबेडकर ने लिखा था। और यह सभी लोग जानते भी है लेकिन आज जो हम आपको बताएँगे वो शायद ही आपने सुना होगा जी हां क्योंकि पहली बार जिसने भारतीय संविधान को लिखा था वो भीमराव आंबेडकर नहीं कोई और थे और उस व्यक्ति का नाम चर्चा से लगभग गायब रहता है यह तकलीफ की बात है। वैसे तो भारतीय संविधान (Indian constitution) को तैयार करने में कई विद्वान लोगों की भूमिका रही है लेकिन एक नाम है (BN Rau Wrote Indian Constitution) , जिन्हें सबसे कम ख्याति मिली. वक्त के साथ धीरे-धीरे हम संविधान तैयार करने में उनके योगदान को भूलते चले. उस विद्वान का नाम है बेनेगल नरसिंह राऊ.

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बेनेगल नरसिंह राऊ (Benegal Narasimha Rau) का जन्म कर्नाटक (Karnataka) के एक बेहद शिक्षित परिवार में हुआ था (BN Rau Wrote Indian Constitution)  . उनके पिता बेनेगल राघवेंद्र राऊ (Father Benegal Raghavendra Rau)मशहूर डॉक्टर थे. नरसिंह राऊ ने मेंगलुरु के कैनरा हाई स्कूल (Canara High School) से पढ़ाई की. उन्होंने पूरे मद्रास राज्य में सबसे ज्यादा अंकों के साथ परीक्षा पास की. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आगे की शिक्षा ट्रनिटी कॉलेज कैंब्रिज (Cambridge College) से पूरी की.1909 में राऊ ने भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की और भारत लौट आए. उन्हें पहली पोस्टिंग बंगाल में मिली. 1925 में उन्हें एक साथ दो पोस्ट ऑफर की गईं. उन्हें असम में प्रोविंसियल काउंसिल के साथ सरकार का कानूनी सलाहकार भी बनाया गया. साल 1935 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के भारत में सुधारों के लिए शुरू किए गए कामों के लिए काम करना शुरू किया. उन्होंने 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट को बनाने के लिए भी अपना योगदान दिया. इसके बाद उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बनाया गया. इसके अलावा वो जम्मू-कश्मीर राजशाही के प्रधानमंत्री पद पर भी रहे.

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आपको बता दें कि सर बेनेगल नरसिंह राऊ (BN Rau Wrote Indian Constitution) भारत के उन काबिल सिविल सर्वेंट, न्यायविद और डिप्लोमेट में थे, जिन्होंने भारतीय संविधान निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अपने समय के सबसे ख्यातिनाम न्यायविदों में शुमार किए जाने वाले नरसिंह राऊ ने ना सिर्फ भारत का बल्कि बर्मा (म्यांमार) का संविधान लिखने में भी मदद की थी साल 1946 में नरसिंह राऊ (BN Rau Wrote Indian Constitution) की विद्वता के मद्दनेजर उन्हें संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार बनाया गया. नरसिंह राऊ ने ही साल 1948 में भारतीय संविधान का शुरुआती ड्राफ्ट बनाकर तैयार किया था. यह हमारे भारतीय संविधान का पहला मूल ड्राफ्ट था. इसी ड्राफ्ट पर संविधान सभा ने अलग-अलग बिंदुओं पर बहस कर हमारा संविधान तैयार किया. बहस के बाद जब हमारा संविधान तैयार हुआ तो 26 नवंबर 1949 को इसे स्वीकार कर लिया गया.

आपको बता दें की भारतीय संविधान (BN Rau Wrote Indian Constitution) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए नरसिंह राऊ ने कई देशों की यात्रा की थी. रिसर्च के सिलसिले में वो अमेरिका (America), कनाडा (Canada), आयरलैंड (Ireland) और ब्रिटेन गए थे. इसक दौरान उन्होंने वहां के न्यायविदों और रिसर्च स्कालर्स से बातचीत की थी. भारत में संविधान निर्माण के काम के बाद बीएन राऊ ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी काम किया. वो वहां जज रहे. साल 1949 से लेकर 1952 तक वो संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि रहे. राऊ यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (Rau United Nations Security Council) के अध्यक्ष भी रहे. भारतीय संसद ने 70 साल के दौरान संविधान  में 103 बार संशोधन किए और इसमें केवल एक संशोधन को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने असंवैधानिक घोषित किया. पहला और अंतिम, दोनों संविधान संशोधन सामाजिक न्याय से संबंधित थे.

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-Mradul tripathi

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