जानिये देशद्रोह कानून क्या है, अब तक किन पर चले देशद्रोह के मुकदमे

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आजकल देशभर में सियासी घमासान मचा हुआ है। हर तरफ लोग किसी को देशद्रोही (History Of Sedition Law) तो किसी को देशभक्त साबित करने में लगे है। तो आइये आज जानते है की आखिर एक आदमी देशद्रोही कब कहलाता है और क्या है देशद्रोही कानून क्या है। भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124A (IPC Section 124)  में देशद्रोह की जो परिभाषा दी हुई है उसके अनुसार , अगर कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, उसका प्रचार करता है या फिर राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करता है, साथ ही संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, यदि कोई व्यक्ति बोले गए या लिखे गए शब्दों और संकेतों द्वारा सरकार का विरोध करता है तो यह देशद्रोह के अंतर्गत आता है इसके अलावा जो भी दृश्यरूपण के माध्यम से विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घॄणा, अपमान करने का प्रयत्न करेगा उसे भी देशद्रोही माना जायेगा। और इस जुर्म के लिए आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है।

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आपको बता दें की देशद्रोह (History Of Sedition Law) पर किसी भी तरह का कानून 1859 तक अस्तित्व में नहीं था। इसे ब्रिटिश सरकार द्वारा 1860 में बनाया गया और फिर 1870 में इसे आईपीसी में शामिल कर दिया गया था। यह कानून आजादी से पहले का है, इस कानून का प्रयोग अंग्रेज उन भारतीयों के खिलाफ करते थे। जो उनकी बात मानने से इंकार कर देते थे सबसे पहले यह कानून 1870 में अस्तित्व में आया था। भारत में तब से लेकर अब तक कानूनों में कई संशोधन हुए हैं, लेकिन ये धारा अभी तक बनी हुई है। इसमें आईपीसी की धारा 121 से लेकर 124 A तक की परिभाषाएं और दंडात्मक प्रावधान सम्मिलित हैं.धारा 121, 122, और 123 देश के विरुद्ध युद्ध के संदर्भ में विवरण है और धारा 123  (section 123) तथा 124 (section 124) राज प्रतीक, राष्ट्रपति और राज्यपाल से सम्बंधित है। आजादी से पहले राष्ट्रपति की जगह क्राउन व्यवस्था हुआ करती थी, जिसको बाद में संशोधित किया गया। देश की आजादी से पूर्व धारा 124 A (section 124 A) जो की अंग्रेजों का बनाया कानून सेडिशन लॉ यानी देशद्रोह कानून है जिसमे आजादी के बाद उसमें राज के स्थान पर सरकार शब्द हो गया। बाद में इस धारा का आईपीसी में जोड़ा जाना और आजादी के बाद भी इस धारा का बने रहना हमेशा बहस का मुद्दा बना रहा है। (History Of Sedition Law) जानकारों के तर्क के अनुसार यह धारा 124 A संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दमन करती है, उसके विपरीत है। पहले ही देश विरोधी कृत्य के लिए संविधान की धारा 19 (1) ए की वजह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगे हुए हैं ऐसे में धारा 124 का कोई औचित्य नहीं दिखता है। देश में शांति व्यवस्था बिगाड़ने के लिए प्रेरित करना, उकसाना , धार्मिक तनाव को फैलाने के लिए आईपीसी में पहले से ही अलग-अलग धाराओं में सजा का प्रावधान मौजूद है इसलिए इस धारा का कोई औचित्य नजर नहीं आता है।

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1962 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा था कि नारेबाजी करना देशद्रोह (History Of Sedition Law) के दायरे में नहीं आता है। वहीं कई ऐसे मामले हैं, जिनमें कोर्ट ने सरकार या प्रशासन के खिलाफ उठाई गई आवाज और शिकायत को राजद्रोह के अधीन नहीं माना है। यह मामला सुर्खियों में तब आया जब बिहार के रहने वाले केदारनाथ सिंह पर वर्ष 1962 में राज्य सरकार ने एक भाषण के मामले में देशद्रोह का केस दर्ज किया था, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक बेंच ने केदारनाथ सिंह केस पर आदेश दिया था। इस आदेश में साफ कहा गया था, “देशद्रोही भाषणों और अभिव्यक्ति को सिर्फ तभी दंडित किया जा सकता है, जब उसकी वजह से किसी तरह की हिंसा हुई हो , असंतोष फैला हो या फिर सामाजिक असंतुष्टिकरण बढ़े।”

जानिए देशद्रोह में क्या आता है-

1837 का दौर था जब भारत में अंग्रेजों ने देशद्रोह (History Of Sedition Law) लागू कर दिया था, इसके पीछे का मकसद बेहद साफ था कि जो भी भारतीय उनके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगा उनके खिलाफ प्रदर्शन करेंगा वो उसको जेल में इस कानून के तहत डाल देंगे। इस कानून को थॉमस मौकॉल ने बनाया था। जिसके अनुसार अगर कोई सरकार के खिलाफ कुछ भड़काऊ बोलता या लिखता है जिससे दंगे और विद्रोह हो जाए देशद्रोह की श्रेणी में आता है। और अगर कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ बोलने वाला का साथ देता है तो वो भी देशद्रोही कहलाता है।(History Of Sedition Law) इसके अलावा संविधान का अपमान और विरोध करना ,देश के प्रतीक चिन्ह और राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान करना, राष्ट्र के गुप्त बातों को दूसरे मुल्कों में लीक करना भी देशद्रोह है। अगर एक नजर आंकड़ों पर डालें तो एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार देश में देशद्रोह के 47 मामले दर्ज किए जा चुके हैं जिसमें से 72 फीसदी मामले सिर्फ बिहार-झारखंड में दर्ज किये गए हैं।
पिछले कुछ सालों में आए मामले चर्चा में रहे जिनमें वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़िया, कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी , पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और जेएनयू प्रेसीडेंट कन्हैया कुमार को इसी देशद्रोह कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।

देशद्रोह अब तक इन पर हुआ है लागू-

1-आपको बता दें की 1870 में बने इस कानून का सबसे पहले इस्तेमाल ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी के खिलाफ किया था। उस समय वीकली जनरल में ‘यंग इंडिया’ नाम से महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)  के आर्टिकल लिखे जो ब्रिटिश सरकार के खिलाफ थे, इससे नाराज होकर ब्रिटिश सरकार ने उनपर देशद्रोह का मुकदमा कर दिया।

2-वर्ष 1962 में बिहार के रहने वाले केदारनाथ सिंह पर राज्य सरकार ने एक भाषण के मामले में देशद्रोह का केस दर्ज किया था, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी और अपने आदेश में कहा गया था, ‘देशद्रोही भाषणों और अभिव्यक्ति को सिर्फ तभी दंडित किया जा सकता है, जब उसकी वजह से किसी तरह की हिंसा, असंतोष या फिर सामाजिक असंतुष्टिकरण बढ़े’। (History Of Sedition Law)

3-वर्ष 2010 को विनायक सेन पर नक्सल विचारधारा फैलाने का आरोप लगाते हुए उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में बिनायक सेन के साथ नारायण सान्याल और कोलकाता के पीयूष गुहा को भी देशद्रोह का दोषी पाया गया था इसके लिए इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।16 अप्रैल 2011 को बिनायक सेन को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत भी मिल गई थी। यह मामला बहुत चर्चित रहा था।

4-वर्ष 2012 में काटूर्निस्ट असीम त्रिवेदी को संविधान को लेकर उनकी साइट पर भद्दी और गंदी तस्वीरें पोस्ट करने के कारण इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। 2011 में यह कार्टून उन्होंने मुंबई में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे एक आंदोलन के समय बनाई थी जिसके चलते उनका बहुत विरोध भी हुआ था। (History Of Sedition Law)

5-वर्ष 2012 में तमिलनाडु सरकार ने कुडनकुलम परमाणु प्लांट का विरोध करने पर एक साथ 7 हजार ग्रामीणों पर देशद्रोह की धाराएं लगाईं थी।

6-वर्ष 2015 में देशद्रोह का केस बहुत चर्चा में रहा क्योंकि गुजरात में हार्दिक पटेल को गुजरात पुलिस की ओर से देशद्रोह के मामले तहत गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वह पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे थे।

7-वर्ष 2016 में जेएनयू के छात्र कन्हैया कुमार को देश विरोधी नारें लगाते पर गिरफ्तार कर लिया गया था, देशद्रोह कानून के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई थी मगर बाद में अपराध सिद्ध ना होने के कारण उन्हें जमानत दे दी गई थी। (History Of Sedition Law)

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-Mradul tripathi

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